पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 174, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत।
हारिलै भई पंथ मैं सेवा। अब तुहि पठवों कौन प...
धौरी पांडुकै कहि पियठाऊँ। जो चितरोखै न दूसरना...
जाय बिवाही पिय कंठलुवा। करै मिलाव सोई गौरवा ॥
कोकिलै भई पुकारत रही। महरं पुकार लीन्ह लै दही ॥
पेड़तिलोरी औ जलहंसो। हिरदैं बैठि बिरहलगनंसा ॥
दो० जेहि पंखी के नेर होय, कहै बिरहकी बात।
सोई पंख जर तरवरै, जाय होय नहिं पात ॥
कुहुककुहुक जस कोयल रोई। रक्त आंश घुँघची बन बोई ॥
भइकर मुखी नयन तन रँती। को सिराव बिरहाडख तौती ॥
जहँ जहँ ठाढ़ होय बनवासी। तहँतहँहोइघुँघचिन्हकीरासी ॥
बूँद बूँद महँ जानौ जीव। गूँजागूँज करहिं पिय पीव ॥
तेहि दुखभई पलास निपाती। लोहू बूड़ उठी होय रँती ॥
राती बिम्बै भये तेहि लोहूँ। परवर पाक फटे हिये गोहूँ ॥
देखों जहां सोइ है राता। जहँ सो रतन कहै को बाता ॥
दो० नापावर्स वह देशरा, नहिं हेवन्त न बसन्त।
ना कोकिल न पपीहरा, जेहिसुनिआवेंकन्त ॥
फिरिफिरि रोयकोई नहिंडोला। आधीरात बिहंगमं बोला ॥
तुइफिरफिरदाँहे सब पांखी। केहिगुन रैयनि न लावेसिआंखी॥
नागमती केहि कारनै रोई। कासों कहूँ जो कन्त बिछोई ॥
मन चित हिये न उतरै भोरे। नयन कजल चपै रहे न मोरे ॥
कोइनजाय तेहि सिंहलदीपा। जेहिसेवाव कह नयनासीपा ॥
- नामचिड़िया १-३-४-५ जानवर परिन्द २ गले लगाया ६ तथा
मर्द ७ नामचिड़ियां ८-६-१०-११-२० दिल १२ पेड़ १३ लालआँख १४
जलीहुई १५ लाल १६ कुंदरू १७ छाती १८ बरसात १६ जलाना२१ रात २२.
वास्ते २३ अलग २४ आँख २५ ॥