पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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पद्मावत। १४७
गोरख शब्द शुद्ध भा राजा। रामा सुनि रावन होयं गाजा॥
गही बांह धन सेजवां आनी। अंचल ओट रही छिपारानी॥
सकुची डरी मुरी मन बीरी। गहु न बांहरे योगि भिखारी॥
ओहटैं हो योगी तोर चेरी। आवे बास करंकटों केरी॥
देखि बिभूत छूत मुहिं लागा। कांपै चांद राहु सो भागा॥
योगी तोर तपसी के कयाँ। लागी चहै अंग मोर बयाँ॥
बार भिखारन मांगसि भीखा। मांगो आयस्वर्ग चढ़शीखा॥
दो० योगि भिखारी कोई, मन्दिर नपैसै पार।
मांगलेहु कुछ भिक्षा, जाय ठाढ़हो बार॥
अन तुम कारणे प्रेम पियारी। राज छांड़िके भयौं भिखारी॥
नेह तुम्हार जो हिये समाना। चित्तौर सो निसखोहै आना॥
जसमालतिमहँ भँवरवियोगी। चढ़ाबियोग चल्यों ह्वैयोगी॥
भँवर खोज जसपावै केवौं। तुम कारण में जिवपरखेवौं॥
भयौं भिखार नारितुम लागी। दीप पतंग है अँगयोंआगी॥
एकबार मरि मिलै जो आयें। दूसर बार मरै कित जाये॥
किततोहिमीचें जोमरकेजिया। भँवर कमल मिलकैरसपिया॥
दो० भँवर जोपावै कमलकहँ, बहुआरतें बहुआस।
भँवर होय न्योछावर, कमल देय हसबास॥
अपने मुहँ न बड़ाई छाजा। योगी कतहूँ होहिं नहिंराजा॥
हौ रानी तू योगि भिखारी। योगिहि भोगिहिकौन चिन्हारी॥
योगी सबै छन्द अस खेला। तू भिखार केहिमाहँ अकेला॥
पकड़ना १ पद्मावत २ दूरहो ३ सूखा टुकड़ा रोटी ४ बदन ५-६
छाया ७ दरवाज़ा ८ आसमान ६ पैठ न सके १० वास्ते ११ दिल १२
दुखी १३ कमल १४ दुख १५-१७ मौत १६॥