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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 147

१४६ पद्मावत ।
दो० साजन लिये पठाई, आयसु जाय न मेट ।
तनमन यौबनसाज सब, देइचलीं लै भेट ॥
पद्मिन गवनैं हंस गये दूरी । हस्तिं लाज मेलहि शिरधूरी ॥
बदनैं देख घटंचन्द छिपाना । दशनैं देखके बीजं लजाना ॥
खंजनैं छिपे देख कै नैना । कोकिलछिपी सुनतमधुवैना ॥
ग्रीवैं देखकर छिपा मयूरू । लंकैं देखकर छिपा सेंदूरू ॥
भौंहधनुष जो छिपा अकारौं । बेनी १२ बासुकिकि छिपापतारा ॥
खड्गैं छिपी नासिका विशेखी । अमृत छिपा अधरैं रसदेखी ॥
पहुँचिहिं छिपा कमल पौनारी । जंघ छिपा कदैली होय वारी ॥
दो० अप्सर रूप छिपाई, जोहि चलै धरैं साज ।
जहँलग गर्वगहेलजग, सबैछिपीमनलाज ॥
मिलीसो गोहनैं संखी तर्राईं । लीन्हचांद सूर्य पहँ आई ॥
परश रूप चांद देखराई । देखत सूर्य गयो मुरझाई ॥
सोरहकिरनदृष्टि शशिकीन्हा । सहसैं किरन सूर्यकहँ लीन्हा ॥
भा रबि २५ अस्त तर्राईं हँसी । सूर्य न रहा चांद परगँसी ॥
योगी आहि न भोगी कोई । खाय करकटौं गयो परसोई ॥
पद्मावत निरमलं जस गङ्गा । नाहिं युक्ति योगी भिखमङ्गा ॥
आय जगावहिं चेला जागहु । आवा गुरू पांय उठलागहु ॥
दो० बोलहिं शब्दैं सहेली, कानलागगहि माथ ।
गोरखै आय ठाढ़ भा, उठरे चेला नाथ ॥
हुक्म १ चाल २ हांथी ३ मुँह ४ दाँत ५ बिजुली ६ ममोला ७ मीठी
बोली ८ गर्दन ६ कमर १० चीता ११ आसमान १२ चोटी १३ नाम राजा
सांपों का १४ तलवार १५ होंठ १६ केला १७ पद्मावत १८ साथ १६ छोटे
नखत २०-२६ सूर्य २१-२५ निगाह २२ चाँद २३ हज़ार २४ खिलना
२७ टुकड़ा रोटी २८ पाक २६ आवाज़ ३० योगी ३१ ॥