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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 10

पद्मावत । ६
मेदने दरश लुभानी, अस्तुति बिनवै ठाढ़ि ॥
पुनि दातारँ दँई जगँ कीन्हा । अस जगँ दान न काहू दीन्हा ॥
बलि औ बिक्रम दानि बड़ कहे। हातिम करहिं बतागी अहे ॥
शेरशाह सरपोंचै न कोऊ । समुद्र सुमेरु भँडारी दोऊ ॥
दान दाँग बाजै दरबारा । कीरति गई समुन्दर पारा ॥
कंचन परस शेर जगँ भयो । दारिद भाग दशन्तर गयो ॥
जो कोइ जाय एक बेर माँगा । जन्म न होय न भूँखा नाँगा ॥
दश अश्वमेध जगतँ जो कीन्हा । दान पुन्य सरै सौहिं न चीन्हा ॥
दो० ऐसो दानि जगँ उपजौ, शेरशाह सुलतान ।
ना अस भयो न होय ना, कोई दै अरु दान ॥
तारीफ़ सय्यद अशरफ़ जहांगीर की ॥
सय्यद अशरफ़ पीर पियारा । जेहि मोहि पंथै दीन्ह उजियारा ॥
लेसा हिये प्रेम करि दिया । उठी ज्योति भानिरमलँ हियौँ ॥
मारगँ होत जो अँधेरा सूझा । भा उजेर सब जाना बूझा ॥
खीरसमुंद्र पाप मोर मेला । बोहितँ धर्म लीन्ह कै चेला ॥
उन मोर करँ बूड़ि कै गहा । पायो तीरै घाट जो अहा ॥
जाके ऐसो होय कँधारौँ । तुरत बेगि सो पावै पारा ॥
दस्तगीर गाढ़े कै साथै । वह अवगाहि दीन्ह जेहि हाथे ॥
दो० जहांगीर वयबिटी, निहकलंक जस चाँद ।
वय मखदूम जगतँ के, हो वह घर की बाँद ॥
१ आदमी १ तारीफ़ २ दान देनेवाला ३-६ ईश्वर ४ दुनिया ५-६-१७-२०-२२-३४
नाम राजा ७-८ नामसखी १० बराबर ११ पहाड़ का नाम १२ नगाड़ा १३
नेकनामी १४ पारसपत्थर १५ बहादुर १६ नाम जगह १८ घोड़ाकी यज्ञ १६
बराबर २१ पैदा हुआ २३ राह २४-२८ दिल २५-२७ पाक २६ नाव २६
हाथ ३० किनारा ३१ मल्लाह ३२ जल्द ३३ ॥