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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 9

८ | पद्मावत।
दो० जोगढ़ै¹ नयनहिं काहू, चलतहोय सब चूर।
जो वह चढ़ै भूमिपति², शेरशाह जगशूरै³ ॥
अद्लैं⁴ कहौं प्रथम⁵ जसहोय। चाँटाँ⁶ चलत न दुखवैकोय ॥
नौशेखाँ जो आदिल⁸ कहा। शाहअदलैं⁹ सैरे¹० सौहिनरहा ॥
अद्लैं जोकीन्ह उमरै¹³ कीनाई। भई यहां संगरी दुनियाई ॥
परी नाँथै कोई छुवै न पारा। मार्गै¹⁴ मानुषसे उजियारा ॥
गऊ सिंहैं¹⁷ रेंगहिं एक बाटाँ। दोनों पानिपियैं एक घाटा ॥
नीरैक्षीर¹⁸ छानै दरबारा। दूध पानि सब करै निराराँ¹⁹ ॥
धर्म न्याय चलै सँतं²⁰ सांझा। दूवर वैरी एक समैं²¹ राखा ॥
दो० संबै पृथिवी अशीशै, जोरि जोरिकै हाथ।
गङ्ग यमुन जौलहि जल, तौलहिं अमरनाथै²² ॥
पुनि रुपैवंत²³ बखौनों²⁴ काहा। जानवन्तजगतंसवेमुखजाहा॥
शेशि²६ चौदहजोदई²७ संवारा। तबहूँ जाहि रूप उजियारा ॥
पापंजाय जो दरशन दीशा। जगँ जुहारके देत अशीशा ॥
जैसो भानुं²⁸ जगै ऊपर तपा। सबै रूप वह आगे छिपा ॥
असभा शूरै पुरुषै³² निरमरौं³³। शूरै जाहि दशआकरै³⁴ करा ॥
सौहिं दृष्टि की हेरै³⁷ न जाई। जेहिदेखा सो रहा शिरनाई ॥
रुपसवाई दिन दिन चढ़ा। बिधि³⁸ सुरूप जगँ³⁹ ऊपरगढा ॥
दो० रूपवन्ते⁴⁰ मनमाथे चन्द्रघाट वह बाढ़ि।
क़िला १ टूटना २ वादशाह ३ दुनिया का सूर्य्य ४ न्याय ५ पहिले ६
चाँवटी ७ नाम बादशाह ८ न्याय करनेवाला ६ न्याय १०-१२ बराबर ११
नाम खलीफ़ा १३ नाथना १४ राह १५-१७ शेर १६ दूधपानी १८ अलग १६
सच्चा २० ज़बरदस्त २१ बराबर २२ हमेशाज़िंदा २३ खूबसूरत २४ बयान
करना २५ दुनिया २६-२६ चांद २७ ईश्वर २८ सूर्य्य ३० संसार ३१ बहा-
दुर ३२-३५ मर्द ३३ पाकसाफ़ ३४ दशगुना ३६ सुधीनिगाह ३७ देखना ३८
ईश्वर ३६ दुनिया ४० खूबसूरत ४१ ॥

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