पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 11, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ें१० पद्मावत।
तारीफ़ सय्यद अशरफ़ जहांगीर के बेटे की ॥
उनकर रतन १ एक निरमरा २। हाजी शेख सभा गुण भरा ॥
तेहि घर दुइ दीपक उजियारे। पन्थ ३ दये कहँ दई सँवारे ॥
शेख मुहम्मद पून्यों ४ करा। शेख कमाल जगत ५ निरमरा ६ ॥
दोउ अचल ध्रुव ७ डोलैं नाहीं। मेरु ८ खण्ड न भेवा ९ उपराहीं ॥
दीन्ह रूप अरु ज्योति गुसाईं। कीन्ह खम्भ दुइ जग १० की ताईं ॥
दोउ खम्भ टेके सब मही। दोनों के भार सृष्टि ११ सबरही ॥
जिन दरशन ओ परशन पाया। पाप हरा निरमल १२ भइ कायाँ ॥
दो० मुहम्मद तहां निचिंत पथै, जिन्ह सँग मुरशद पीर।
झाहिरी नाव औ खेवकैं, बेगि १५ लागि सो तीर १६ ॥
गुरु मुहदी खेवकैं मैं सेवा। चली उताहल जेहिके खेवा ॥
अगुवा भयो शेख बुरहानू। पंथ १७ लाय म्वहिं दीन्हों ज्ञानू ॥
अलहदाद भल तिन्हकर गुरू। दीन दुनी रोशन सुर्खुरू ॥
सैद मुहम्मद के वै चेला। सिद्धपुरुष संग में जिन खेला ॥
दानयाल गुरु पन्थै लखाई। हजरत ख्वाजा खिजिर तेहिं पाई ॥
भये प्रसन्न वै हजरत ख्वाजे। ऐ मेरे जियैं सय्यद राजे ॥
वै सेवन मैं पाय करेते। अखरी जीभ प्रेम कब बरते ॥
दो० वै सुगुरू हौं चेला, नितैं २३ बिनवों भा चेर।
उन हुत देखी पाउँ, दरश गुसाईं २४ केर ॥
एक नयनैं कवि मुहम्मद कने। सोई बिमोहौं जें कवि सुने ॥
१ जवाहिर २ साफ़ २-११ राह ३-१३ चांद ४ संसार ५ पाकसाफ़ ६ नाम
सितारा ७ बीहड़ ८ दुनिया जहान ६-१० वदन १२ मंझाह १४ जल्द १५ कि-
नारा १६ नाव खेनेवाला १७ राह १८-२१ मर्दकामिल १६ सत्संगत २० खुश २२
हमेशा विनती करना २३ ईश्वर २४ आंखें २५ मोहजाना २६ ॥