माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त)
ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा
स्रोत: माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त) · राजयोग मेडिटेशन अकादमी / ओशो · 1974 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपाप बतलाने लगा, वह पाप अपने ऊपर ले, जान बूझ जान कर विष खाए सो मरे
ही मरे, बाल अवस्था में विद्या न अभ्यास करे, तो परलोक में वह सब जन में
तिरस्कार पाए ऐसा है, सो ईश्वर के हाथ सब कुछ नहीं
जो जीव के भाग्य में है वही जीव को मिलेगा
सो कर्म ही बलवान् है ईश्वर के जानने वालो ऐसा जानो, ज्ञान
विचार बिना जो नर जन्म सो वृथा है, ज्ञान से सर्व उत्तम पदार्थ को पावे
अज्ञान से नर, पशु के सो बराबर, ज्ञानी जन सदा काल सुखी व मानी
पदार्थ पाता है जो, तो विचार कर मन में, विषय के त्यागे से सब सुखकारी
जो मन शुद्ध व निर्मल करेगा सब काम सिद्ध करेगा जो मन मैला, भय
भयावना तो वह नरक वास में गिरेगा जो मन शांत व सब सुख व सब आनन्द
व रूप, जहां न धूप, तृष्णावली व सब आपदा छूटेगी? ज्ञानी सो जन जो अचल सो
मन को जन करे, सो मन को ब्रह्म--सो मिलावे, सो स्वरूप, सो स्वरूप--
आदि अन्त सब एक रस, ईश्वर सो सब रूप जान सर्व रूप घट घट
सब घटों विषे एक काल जाने, सो नर सब काम-क्रोध से छूट के सदा सुखी?
कोई नर अज्ञानी हो सो पछतावे?
सो बात सुनो, अज्ञान का नाश जो विचार से स्वरूप विचार कर सो ज्ञान
पावे तो स्वरूप सदा आनन्द से आनन्द--धाम सदा सो सो सदा सो स्वरूप
पद--को सो पावे जहां अविद्या का नाश सदा काल रहे सो सो सब
विकार घट घट से समाप्त हो स्वरूप में मिल सदा सो परमानन्द स्वरूप--
सो सदा सो वास जो वास सो वास सो वास सो वास सो जन जन सो सब
विकारों से सो ज्ञानवान् सदा सर्व काल से रूप ज्ञान करे
सो जन सब जाने, सब नाम सो, ज्ञान से जाने घट सो जन सो, अज्ञान से
अज्ञान विकार सदा सो सो सो जन से अज्ञान से ज्ञान कल्याण सब जन जाने
ज्ञान से सदा, ज्ञान से मुक्ति सो, जो ज्ञान से स्वरूप का ध्यान सदा कर सो
नर सब फल-रूप को न सो पावे?
ऐसा सब नर जान ध्यान सो कर स्वरूप को पावे! जो ज्ञान से ध्यान न करे
अविद्या के जाल में फंसे, ज्ञान बिना कोई न तर सो नर जो काम क्रोध
सदा काम बाधा से अज्ञान घट सदा काल रहे न सुख सो! जो ज्ञान करे
सो नर सो मुक्ति को पावे, कहो, मुक्ति कौन सी? कौन मुक्ति से? ज्ञान से क्या?
ज्ञान सब को सो मुक्ति विचार से नर को, अज्ञान से अज्ञान से मुक्त सब
नर
सो ज्ञान सब जान, सो ज्ञानी, स्वरूप के सब विकार ज्ञान से समाप्त
ज्ञान सब घट को ज्ञान से समाप्त है, अज्ञान बिना ज्ञान को ज्ञान से मुक्ति
ज्ञान सब, जो ज्ञान सब घट सब जाने सो, स्वरूप के स्वरूप सदा सो स्वरूप
ज्ञान से स्वरूप सो सदा सो सब सो अज्ञान से सो सो सो स्वरूप प्रकाश
प्रकाश प्रकाश प्रकाश सब अज्ञान ज्ञान ज्ञान सदा सब सो सदा सो ज्ञान सो,
स्वरूप ज्ञान सब सब अज्ञान से सो अज्ञान से सो ज्ञान सो सो सो सदा प्रकाश
सो सदा प्रकाश!
ज्ञान का वास सो स्वरूप स्वरूप सब सब अज्ञान ज्ञान सो सो, सब सब
अज्ञान से ज्ञान
सो सदा ज्ञान सब रूप से सब सब अज्ञान से सो सदा ज्ञान सो ज्ञान सो
ज्ञान सब घट सो ज्ञान ज्ञान से सो सदा ज्ञान ज्ञान ज्ञान सो, सो स्वरूप सो
स्वरूप सब ज्ञान ज्ञान सब घट सो सो अज्ञान सदा सब सो सो अज्ञान सो सब
सो काल-काल, सब सो ज्ञान सो सो सो ज्ञान सो सो सो ज्ञान सब स्वरूप सब
सब, अज्ञान स्वरूप सो सो ज्ञान सो सो स्वरूप से सब ज्ञान सो ज्ञान सो ज्ञान
सो सो ज्ञान स्वरूप सब ज्ञान सब सो, स्वरूप सदा स्वरूप सो ज्ञान सो सो
सब सो सब ज्ञान प्रकाश सो सो सो सो सो ज्ञान व ज्ञान सो स्वरूप स्वरूप
सब सब ज्ञान सब सो ज्ञान सो, अज्ञान सब अज्ञान सब सो ज्ञान सो सो सब
स्वरूप सब स्वरूप सब ज्ञान ज्ञान सो स्वरूप सब ज्ञान ज्ञान सो ज्ञान सो
स्वरूप सो स्वरूप सब, सब सो ज्ञान, सो ज्ञान सब सो! सो सब ज्ञान सो
ज्ञान, सब स्वरूप ज्ञान सब सब सब स्वरूप सदा सब ज्ञान सब सो ज्ञान
ज्ञान सो सो ज्ञान सो सब सो सो ज्ञान सदा सो सदा सदा सदा सब सब सो
स्वरूप सब ज्ञान ज्ञान सो ज्ञान सब ज्ञान
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