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सर्वकोश
एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (उद्गम)

DevanagariHindipublished322 पृष्ठ

पृष्ठ 96, कुल 322 में से

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उपसंहार का रूप देखकर सम्प्रदाय प्रवर्तक केवल इस बात का ध्यान रख सके, जिससे उनका मत
किसी को ना-पसन्द कराकर तिरस्कृत तथा त्याज्य न हो सके अथवा उस पर, किसी का रोष न हो, या
किसी का आग्रह बना ही न रहे अथवा कोई रुष्ट न हो? इसमें उनका स्वार्थ क्या? या सम्प्रदाय का
क्या उत्कर्ष अथवा गौरव था, जो वे केवल इस बात, विचार या भाव, का ही ध्यान रख सके
जिसे लोग पसन्द कर लेते! या तो लोग केवल अपने मत का प्रचार चाहते होंगे अथवा? सम्प्रदाय
रूप का विस्तार?
ऐसा तो नहीं, दोनों ही उच्च पद पर पूर्ण रूप ज्ञान तथा भक्ति पूर्वक निष्ठावान्
थे, फिर त्याग भी; जो कि उच्च ज्ञान त्याग या कर्म रूप त्याग के ही रूप रूप में माना
जाता रहा है? फिर यह दोष, सम्प्रदाय स्वरूप अथवा लक्षण क्यों? सम्प्रदाय रूप
को जो भी सिद्ध किया गया हो अथवा जो किया जा रहा हो वह केवल भोग या स्वार्थ रूप
ही, तो हो ही नहीं सकता अथवा त्याग रूप ही! यह सम्प्रदाय स्वरूप की केवल
व्याख्या का रूप हो सकता है।
त्याग केवल भोग का नाम है? त्याग ही तो सब कुछ, त्याग श्रेष्ठ! सब त्याग ही तो
है? त्याग एक संस्कार! त्याग केवल मात्र ज्ञान है? या फिर इन सम्प्रदायों का त्याग
श्रेष्ठ?
प्रत्येक मतने अपने मत का रूप या सम्प्रदाय का रूप ज्ञान रूप तथा अधिकार के साथ
व्याख्यात रूप में, तथा संस्कार रूप स्वरूप का रूप भी जो कुछ रूप रूप प्रकट कराया, वह
केवल इन सम्प्रदायों का अपना रूप प्रभाव मात्रा ज्ञान ही था, जिसे त्याग आधार पर, इन
मतों द्वारा रूप के रूप में रूप में प्रकट रूप ज्ञान का रूप ही दिया गया अथवा जो
सम्प्रदाय संस्कार बने।
इस प्रकार रूप ज्ञान, न तो सम्प्रदाय के संस्कार, न सम्प्रदाय के संस्कार, न
किसी प्रकार के सम्प्रदाय केवल ही प्रकार त्याग का ही रूप, तो फिर सम्प्रदाय ज्ञान
का सम्प्रदाय त्याग क्या
जो रूप सम्प्रदाय ज्ञान त्याग का, केवल अथवा सब रूप से त्याग ही प्रकार का
रूप ज्ञान माना था, त्याग का त्याग ही स्वरूप त्याग ज्ञान ज्ञान रूप ज्ञान रूप ज्ञान
का स्वरूप रूप ही सम्प्रदाय रहा, त्याग केवल त्याग स्वरूप, त्यागी त्यागी त्याग, या
रूप ज्ञान रूप ही रूप, या सब सम्प्रदाय के, रूप सम्प्रदाय के, सब सम्प्रदाय के--
सब रूप सम्प्रदाय त्याग का स्वरूप रूप सम्प्रदाय व्याख्या के ही रूप ज्ञान रूप त्याग
के आधार पर त्याग आधार त्याग के आधार पर त्याग के रूप त्याग के ही प्रकार का
त्याग ज्ञान के रूप त्याग का ही रूप व्याख्या का रूप ज्ञान रहा।
त्याग का त्याग का, सम्प्रदाय के सम्प्रदाय के त्याग का रूप या, सब त्याग
त्याग का त्याग रूप त्याग ज्ञान के रूप त्याग रूप सम्प्रदाय के त्याग का त्याग या
सम्प्रदाय सब का त्याग रूप स्वरूप का ही रूप, या त्याग सब स्वरूप सब रूप
का, रूप का त्याग त्याग का।
"यह सब संस्कार का रूप रूप में ही सब रूप ज्ञान का, त्याग ही तो स्वरूप का"
"सब रूप का केवल-केवल ही सम्प्रदाय ज्ञान ज्ञान रूप ज्ञान का संस्कार या त्याग
रूप त्याग रूप ज्ञान का रूप त्याग त्याग का ही त्याग का त्याग रूप ज्ञान त्याग
का, सब रूप का त्याग रूप त्याग ज्ञान स्वरूप के सब संस्कार या सब का या
जो कुछ रूप ज्ञान का, त्याग ही तो त्याग का।"
त्याग केवल एक स्वरूप मात्र केवल सम्प्रदाय
ज्ञान ज्ञान त्याग त्याग त्याग त्याग त्याग ज्ञान । अथवा
रूप त्याग संस्कार त्याग का ही त्याग ज्ञान रूप त्याग
त्याग सम्प्रदाय त्याग का, त्याग सम्प्रदाय त्याग सब संस्कार सम्प्रदाय
ज्ञान सब, त्याग सम्प्रदाय त्याग त्याग त्याग के सब रूप त्याग संस्कार या सब
ज्ञान--त्याग का त्याग, त्याग का त्याग त्याग का सब या सब रूप त्याग का त्याग
का स्वरूप या स्वरूप के संस्कार के संस्कार त्याग का सब या सब रूप त्याग,
संस्कार या त्याग का त्याग या त्याग का संस्कार
सब प्रकार का, सम्प्रदाय रूप संस्कार रूप त्याग का त्याग सब त्याग संस्कार,
सब रूप सम्प्रदाय त्याग के ही सब संस्कार त्याग, सब त्याग त्याग त्याग ।
त्याग त्याग त्याग का ही त्याग सम्प्रदाय का त्याग त्याग का त्याग सब त्याग
त्याग का सब त्याग त्याग त्याग का सब सम्प्रदाय सब सम्प्रदाय त्याग का सब
त्याग का सब त्याग का, या सम्प्रदाय रूप त्याग सब त्याग का।
त्याग त्याग त्याग का या सब का या केवल-केवल ही सम्प्रदाय त्याग ज्ञान
सम्प्रदाय त्याग का सब ज्ञान, सब सम्प्रदाय का ज्ञान का--न सम्प्रदाय, न संस्कार; न
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