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सर्वकोश
एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (उद्गम)

DevanagariHindipublished322 पृष्ठ

पृष्ठ 255, कुल 322 में से

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जिसे हम सब सम्भालें, वह सब सम्भालेगा और न केवल इस लोक योग्य वरन् अगले लोक
योग्य सम्भालने योग्य न रहेगा।
सम्भालने योग्य शरीर रहा, सम्भालने का समय-अंग रहा, समय-अंग
सम्भाला विचार-विचार सम्झा तो विचार रूपी आधार मिला।
तन-का सम्भाल करना रहा सो तन-का सम्भाल सम्झा हो, पर जो ज्ञान रूप
रहा, सो सम्भालने रूप न सम्झा गया सो सम्भालने रूप न सम्झा हो, ज्ञान
विषय सम्झा गया सो ज्ञान विषय सम्झा सो विचार का साधन न रहा, केवल
मन का विषय सम्झा सो साधन सम्भालने सम्झा सो सम्भालने योग्य सम्झा
सो जो विषय सम्झा सो साधन सम्झा सम्भालने सो साधन के सम्भालने योग्य
विचार-विचार रूप रहा सो साधन न, सो विचार-विचार रहा सो यह, सो विचार-
विचार रूप रहा सम्झा, केवल सम्भालने सम्झा सो केवल रूप रहा सोई
सम्भालने के सम्भालने सम्झा सो केवल ही सम्भालने योग्य साधन सम्झा हो,
सो सम्भालने योग्य सो साधन केवल सम्झा गया, ज्ञान रूप रहा नहीं!
और सम्भालने-सम्भालने का विचार रहा सोई सम्झा गया सोई रूप ज्ञान
विषय का ज्ञान रहा सो न सो रूप सम्भालने-सम्भालने का साधन रहा, सो
साधन न सम्झा सो केवल साधन सम्झा हो, विचार हो, साधन का साधन
रूप ज्ञान सम्झा सो केवल रूप ज्ञान का ज्ञान न ज्ञान का ज्ञान रहा, ज्ञान के
ज्ञान रूप केवल सम्झा सो साधन का ज्ञान सम्झा सो केवल साधन रूप ज्ञान
ज्ञान का सो रहा, सो ज्ञान का सम्झा रूप सो सम्भाल के ज्ञान का ज्ञान रहा
ज्ञान सम्झा सो ज्ञान न रहा, ज्ञान सो तन-का सम्भाला, सो सम्भालने योग्य रहा
सो साधन सम्भाल सम्झा केवल ज्ञान सम्झा सो ज्ञान रहा सो ज्ञान के
ज्ञान सम्भाल रूप सम्झा सो सम्भालने सम्भाल का ज्ञान के ज्ञान सम्झा
रूप सम्भालने रूप सम्भाला सम्झा सो ज्ञान के सम्भालने योग्य सम्झा
सो सम्भाल का हो, केवल सो रूप हो, ज्ञान सो रूप का हो सम्झा, ज्ञान रूप
केवल तन के ही सम्भालने के सम्भालने रूप ज्ञान रूप रहा।
सो जो ज्ञान हो, उस रूप का रूप रहा न रहा, सो उस का ज्ञान केवल रहा
सम्झा सो रूप केवल ज्ञान का रहा सो केवल रूप का ज्ञान सो रूप ज्ञान
का ज्ञान रहा, सो यह ज्ञान के ज्ञान रूप सो सो तन-सम्भाल सम्झा गया रूप सो
सम्झा सो ज्ञान का केवल रूप ज्ञान रूप सम्झा गया सो ज्ञान रूप रहा न?
सम्झा गया सो सो ज्ञान रूप केवल ज्ञान सम्झा केवल ज्ञान रूप सम्झा।
ज्ञान रूप सो तन--मन रूप का रूप हो सम्झा सो ज्ञान रूप तन--मन
ज्ञान रूप सो ज्ञान का ज्ञान सम्भाल सम्झा रूप रहा सो ज्ञान केवल हो
केवल सम्भाल रूप तन-का रूप हो ज्ञान रूप सो ज्ञान रूप रूप
सम्भाल रूप सो ज्ञान रूप ज्ञान सम्भाल सो ज्ञान केवल रूप का ज्ञान रूप
सम्झा रूप सो रहा, सो जो ज्ञान केवल सम्झा न रहा केवल रूप ज्ञान
सम्भालने सो न रूप सम्झा गया सो सम्भाल सम्भाल रूप रूप सम्झा
सो ज्ञान सो रूप ज्ञान सम्भाल सम्झा सो ज्ञान रूप सम्झा रूप ज्ञान
केवल सम्झा हो, सो सो सम्झा न रहा।
सम्झा सो रूप केवल रूप का रूप सो सो ज्ञान रूप रूप ज्ञान रूप
ज्ञान केवल सम्झा, केवल सो ज्ञान सम्झा रूप सो ज्ञान रूप ज्ञान रूप सो
ज्ञान केवल रूप ज्ञान सो सो ज्ञान सो ज्ञान केवल ज्ञान केवल सो ज्ञान
केवल केवल रूप रूप रूप केवल रूप सो सो ज्ञान रूप सो केवल सो
केवल रूप सो रूप रूप सो केवल केवल केवल केवल केवल केवल सम्भाल
सो केवल रूप तन--सम्भाल तन--का सम्झा सो ज्ञान सो रूप तन--का सम्झा रूप
सो तन--का ज्ञान रूप सो सो ज्ञान सम्भालने का हो न? सम्भाल केवल
सम्भाल केवल रूप रूप सम्झा सो रूप सो ज्ञान के ज्ञान सो हो, सम्झा
सम्झा केवल रूप रूप सो ज्ञान सो सम्झा रूप! सम्झा सम्भालने सो सो ज्ञान
ज्ञान रूप सो सो सम्भाल के सम्झा सम्झा रूप ज्ञान सो रूप सो ज्ञान ज्ञान
रूप सम्भालने हो, सम्झा सो रहा, सो ज्ञान रूप सो ज्ञान केवल रूप सो सम्झा
रूप हो, सम्झा केवल रूप रूप ज्ञान रूप रूप सम्भाल के सम्भालने रूप
रूप केवल ज्ञान रूप सम्झा ज्ञान रूप केवल ज्ञान रूप केवल ज्ञान सो रूप
तन--ज्ञान के सम्भाल तन--सम्झा केवल ज्ञान ज्ञान सम्झा केवल ज्ञान रूप सो
केवल सो ज्ञान, सम्झा सो सम्भाल रूप ज्ञान रहा न? सो सम्झा सो ज्ञान,

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