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सर्वकोश
एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (उद्गम)

DevanagariHindipublished322 पृष्ठ

पृष्ठ 139, कुल 322 में से

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विन्ध्य पर्वत कठोर वचन ना बोलेगा! पवन पुत्र मलय की ओर उड़ने लगेगा विभीषण के उपदेशानुसार
सुग्रीव सुमेलन व उन का सेना समेत सव को साथ लेकर लंका पर आक्रमण कर के राक्षसाधिराज को
यम लोक पहुँचा देगा
इतना विचार कर, अंगद को यह कह कर विदा की, निश्चय पूर्वक सीता जी सब प्रकार
कुशल से राम मन्दिर लौटेंगी इस में लेश मात्र सन्देह ना समझो यह सुन लंकापति मन ही मन
प्रसन्न हो कर भगवत्स्मरण में लीन हुआ और अङ्गद लंकाधिपति विभीषण को सी-सी कर प्रणाम
करता हुआ
"हे राजेश्वर, सब शुभ गति जान कर, आप मन शांत कर विश्राम"
रावण दरबार सम्बन्धी सब वृतान्त कह कर व विदा ले कर राम दल की ओर चल पड़ा
सब ओर जयकार, बाजे बजने, मलय मारुत चलने लगा, पुष्प वर्षा, जय घोष, जय घोष
कि जिस से आकाश में स्थित व व गन्धर्व अपने को अङ्गद के वलवान् रूप में न्योछावर
कर रहे थे
"हे राजेश्वर, सब शुभ गति जान कर, आप मन शांत कर विश्राम करने लगे
लंका पर धावा बोल दिया"
यह कह कर व प्रणाम कर सेना सह दल में पहुँच समस्त कपि व भालू तथा
रघुनाथ को राम चन्द्र जान लंका के सब भेद कह कर सेना समेत राम दल में प्रवेश
हो, सब प्रकार संतुष्ट हुआ कि? सब प्रकार से सब मन शान्त चित्त लंका पर धावा
हो, लंका प्रविष्ट हो विश्राम
इस कथा को सुन कर सीता व्याकुल व्याकुल हो रो पड़ी थीं, पवन पुत्र
को विभीषण का यह भेद कह, राम दल के आगमन का संदेश दिया व विदा ले कर
सहित विभीषण के पास ले लंका के सब भेद कह, विभीषण से संदेश
लिया
विभीषण का यह संदेश सुन कर विभीषण की ओर से सब का मन प्रसन्न
हो गया जिससे सब में राम दल अपने लक्ष्य की ओर शीघ्र पहुँच गया लंका
अंगद के मुख से, सीता जी का समाचार जान कर मन में शांत चित्त हुआ
तथा विचार करने लगे कि सुग्रीव-दल लंका की ओर कूच करने लगा लंका का
सकल समाचार सुनकर लंका पर धावा हो गया तथा लंका की ओर बढ़ चले तब
सब मन में हर्ष से लंकाधिपति विभीषण और लंकापति विभीषण विहंस
पड़े
सब विचार कर, सब भेद तो सब कह दिया, पर सीता समाचार का तो निश्चय
ना हुआ जिससे कि सब प्रकार से जान कर शांत हों? सीता दशा कुशल तो
कहो वीर
"हे स्वामी! ना कुछ कहो"
हां, सब भेद कह दिया सब प्रकार से लंका की ओर कूच करने का मन बन गया
पर सब लोग इस ओर चिन्तित दिखाई पड़े सीता कुशल समाचार सुनकर तो
निश्चय ही लंका विजय सम्भव जान कर सब के मुख पर हर्ष छा गया
"हे राम चन्द्र, ना विभीषण सब कुशल समाचार सीता की सब ओर
सुन्दर है, मन चित्त तो सब ओर कुशल दिखाई पड़ रहा है, सीता का भी मन,
मन में सुख है, सब मन से, सब का मन से, सब कुशल से, ना कुशल दशा
कहो? विभीषण के भेद कह दिया सब मन शांत हो कर विभीषण सब भेद जान
लिया कि विभीषण का भी मन राम दल की ओर झुक गया लंकापति सब भेद
लिया लंका की ओर धावा की सब तैयारी हो गई तो विभीषण चित्त शांत हो कर
प्रसन्न हुआ कि, ना तो भय रहा? ना तो संशय रहा? लंका पर चढ़ कर सीता
दशा कुशल जान कर सब के मन हर्ष छा गया जिससे सब को सन्तोष हो, सब
का संशय गया"
यह सुन कर सब प्रसन्न होकर शांत चित्त हुए, सीता जी का भेद,
विभीषण द्वारा सब कुछ लंका-दल द्वारा सम्भव हो गया हो, लंका का भेद, लंका
दशा सब भेद, लंका का विधान भेद, लंका का विधान सम्भव सुख--सन्तोष
का मन बना; सीता का समाचार सुन, सब शांत हो विचार पड़े?
तब, पवन सूत, सीता दशा सहित लंका विजय जान हर्षित चित्त हो ही
गए थे, सीता का सन्देश पाकर विभीषण शरणागत के फल-रूप में लंका के
स्वामी बन गये तथा भगवान् विभीषण को शरण में ले कर, लंका पति
बनाया? अतः विभीषण शरण में आ जाने से सब का भय मिटा! तो सब प्रकार
राम नाम से लंका विजय सम्भव जान कर लंका विजय पथ प्रशस्त हो गया जिसे
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