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सर्वकोश
न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda

विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 67, कुल 350 में से

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पृष्ठ 67

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परिच्छेदः १ ] भाषाटीकासमेता. ४३
गन्धसमवायिकारणतावच्छेदकतया सिद्धयति, अन्यथा गन्ध-
त्वावच्छिन्नस्याकास्मिकत्वापत्तेः । नच पाषाणादौ गन्धाभावा-
द्गन्धवत्त्वमव्याप्तमिति वाच्यम् । तत्रापि गन्धसत्त्वात् । अनुपल्-
ब्धिस्त्वनुत्कटत्वेनाप्युपपद्यते, कथमन्यथा तद्भस्मनि गन्ध
उपलभ्यते । भस्मनो हि पाषाणध्वंसजन्यत्वात् पाषाणोपादानो-
पादेयत्वं सिद्धयति । यद्द्रव्यं यद्द्रव्यध्वंसजन्यं तत्तदुपादानो-
पादेयमिति व्याप्तेः । दृष्टं चैतत्-खण्डपटे महापटनध्वंसजन्ये ।
भाषा-यद्यपि पृथिवीका लक्षण गन्धवत्त्वमात्र कहना उचित है तथापि
लक्षणमें समवायिकारणताका निवेश ' पृथिवीत्व ' जातिमें प्रमाण उपन्यासके
लिये जानना चाहिये ( तथाहि ) उसकी रीति यह है कि-गन्धकी जो समवायि