न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)
Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda
विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविशेषवक्तव्य।
इस न्यायसिद्धान्तमुक्तावलीप्रकाशका प्रकाश यद्यपि मेरी लेखनीद्वारा एकदा तो पूर्ण
रूपसे श्रीकाशीजीमें होही चुकाथा तथापि मेरी जो यह अभिलाषा थी कि यह शत
सहस्रधा होकर देशदेशान्तरके अनेक विद्वानोंकी दृष्टिगोचरहोकर पवित्र होय तथा वि द्या
भिलाषि विद्यार्थिगणका स्वल्प व्ययहीसे मित्रहोय उसका पूराहोना मेरी शक्तिसे अतिक्रान्त
था तदर्थ मैंने जगत्प्रख्यात दीनपालक व्यापारमिषेणार्य्यसद्ग्रंथजीर्णोद्धारक महापरोपकारी
दानसन्मानादि अनेकसद्गुणसम्पन्न वैश्यकुलकलापकुमुदकलानिधि मुम्बईके सुप्रतिष्ठित
सेठ श्रीमान् खेमराजश्रीकृष्णदासको सूचना दी तो उन्होंने प्रेमपूर्वक सर्वप्रियधनके व्ययसे
तथा मुद्रायंत्ररूप अपूर्वमहाशक्तिसे मेरे शुभसंकल्पको सफलकिया; इसलिये मैं इस स
द्गुणसम्पन्न सद्गृहस्थको अनेकशः धन्यवाददेताहूँ. तथा परमेश्वरसे प्रतिक्षणप्रार्थीहूं कि यह
दीर्घकालतक सुखपूर्वक आरब्धकार्य्यमें प्रतिदिन उन्नति करताहुआ लोकोपकारपूर्वक
यशोभागी बनारहें--इतिशम् ।
निवेदक काशीनिवासी-
निर्मल पं० स्वामीगोविन्दसिंहसाधुः