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सर्वकोश
न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

Nyayamanjari of Jayanta Bhatta Part 1

आचार्य जयन्त भट्ट (सम्पादक: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

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spaces around ऽ?
"पूर्वोक्तवीथ्या ऽनेन पथा ऽस्तु वा ॥" - yes, printed with spaces around avagraha: "पूर्वोक्तवीथ्या ऽनेन पथा ऽस्तु वा ॥"

Line 17:
"ध्वनिनिराकरणम्-"

Line 18:
"एतेन शब्दसामर्थ्यमहिम्ना सो ऽपि वारितः ।"

Line 19:
"यमन्यः पण्डितंमन्यः प्रपेदे कं चन ध्वनिम् ॥"

Line 20:
"विधेर्निषेधावगतिर्विधिबुद्धिर्निषेधतः ।"

Line 21:
"यथा—" (or "यथा-")

Line 22:
"भ्रम धम्मिअ वीसत्थो(१) मा स्म पान्थ गृहं विश ॥"
Wait, note the (१) is directly attached to वीसत्थो: "वीसत्थो(१)".

Line 23:
"मानान्तरपरिच्छेद्वस्तुरूपोपदेशिनाम् ।"
Wait, look at "परिच्छेद्वस्तुरूपोपदेशिनाम् ।"
Yes, exactly as printed.

Line 24:
"शब्दानामेव सामर्थ्यं तत्र तत्र तथा तथा ॥"

Line 25:
"अथ वा नेदृशी चर्चा कविभिः सह शोभते ।"

Line 2