न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)
Nyayamanjari of Jayanta Bhatta Part 1
आचार्य जयन्त भट्ट (सम्पादक: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा
DevanagariHindipublished654 पृष्ठ
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इ त्य ल म ति च्छो दे न ॥
Yes! इत्यलमतिच्छोदेन ॥
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जातिसाधनोपसंहारः-
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Verse 1 (Lines 21-22):
बाह्यार्थविषय एवं व्यवहारो घटत इत्ययं कस्मात् ।
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बाह्यार्थविषय एवं व्यवहारो घट इत्ययं कस्मात् ।
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