न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)
Nyayamanjari of Jayanta Bhatta Part 1
आचार्य जयन्त भट्ट (सम्पादक: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा
पृष्ठ 138, कुल 654 में से
संदर्भ में पढ़ें" "पदोद्गीत" "निर्मलन्न्यायलक्षणाः"
Wait, why "निर्मलन् न्यायलक्षणाः"?
Wait, could it be:
"तत्पूर्वकपदोद्गीतं निर्मलन् न्यायलक्षणाः ।"?
Wait, look at the word:
त-त्पू-र्वा-क-प-दो-द्गी-त-नि-र्म-ल-न्या-य-ल-क्ष-णाः
Wait, count syllables:
तत् (1) पूर् (2) व (3) क (4) प (5) दोद् (6) गी (7) त (8)
निर् (1) म (2) लन् (3) न्या (4) य (5) ल (6) क्ष (7) णाः (8)
Wait!
If it's:
तत् पूर् व क | प दोद् गी त |
1 2 3 4 | 5 6 7 8 | (8 syllables)
निर्मु...
Wait, in Anustubh:
Pathyā: syllables 5, 6, 7 are usually:
In odd pada: ⏑ – – (laghu, guru, guru) or similar.
In even pada: ⏑ – ⏑ (laghu, guru, laghu).
Let's check the meter:
Pada 1 (odd):
तत् (G) पूर्व (G) क (L)