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सर्वकोश
नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Nitivakyamritam of Somadeva Suri with Commentary

आचार्य सोमदेव सूरि (टीकाकार: पं. रामचन्द्र मालवीय) द्वारा

DevanagariHindipublished220 पृष्ठ

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CC-0. In Public Domain. Digitization by eGangotri
१८६ नीतिवाक्यामृतम्
ब्राह्म, दैव, आर्ष ओर प्राजापत्य ये चार धर्म्यं अर्थात् शास्त्र धर्मोक्त
विवाह हैं।
मातुः पितुर्बन्धूनां चाप्रामाण्यात् परस्परानुरागेण मिथः समवायाद्
गान्धर्वः ॥ ६ ॥
माता-पिता और बन्धु-बान्धवों द्वारा प्रमाणित अर्थात् स्वीकृत हुए बिना
ही परस्पर प्रेम वश पुरुष और स्त्री का सम्मिलन गान्धर्व विवाह है।
पणबन्धेन कन्याप्रदानादासुरः ॥ १० ॥
पैसे रुपये का मोल करके अर्थात् वर के पिता से कुछ रुपया आदि लेकर
कन्या देना 'आसुर' विवाह हैं।
सुप्तप्रमत्तकन्यादानात् पैशाचः ॥ ११ ॥
सोती हुई अथवा मदिरा आदि के नशे से मत्त कन्या का दान 'पैशाच'
विवाह है।
कन्यायाः प्रसह्मादानाद् राक्षसः ॥ १२ ॥
बलात् कन्या का अपहरण करना 'राक्षस' विवाह है।
एते चत्वारोऽधर्म्या अपि नाधर्म्या यद्यस्ति वधू-वरयोरनपवादं पर-
स्परस्य भान्यत्वम् ॥ १३ ॥
यद्यपि गान्धर्व, पैशाच, आसुर और राक्षस ये चारों विवाह धर्म-सम्मत
नहीं हैं तथापि यदि वर और वधू के बीच परस्पर निर्दोष अनुराग है तो ये
अधर्म संगत नहीं होते।
उन्नतत्वं कनीनिकयोः, लोमशत्वं जङ्घयोः, अमांसलत्वमूर्वोः, अचा-
रुत्वं कटि-नाभि-जठर-कुचयुगलेषु, शिरालुत्वम् अशुभसंस्थानत्वं च
बाह्वोः, ऽकृष्णत्वं तालुजिह्वाधरं हरीतकीव, विरलविषमभावो दशनेषु,
कूपत्वं कपोलयोः, पिङ्गलत्वमक्ष्णोः, लग्नत्वं पि ( चि ) ल्लिकयोः, स्थपु-
टत्वं ललाटे, दुःसन्निवेशत्वं श्रवणयोः, स्थूलकपिलपरुषभावः केशेषु,
अतिदीर्घातिलघुन्यूनाधिकताऽसमवादि-कुब्ज-वामन किराताङ्गत्वं, जन्म-
देहाभ्यां समानताधिकत्वं चेति कन्यादोषाः । सहसा तद्गृहे स्वयमाहूत-
स्यागतस्य वाभ्यक्ता, व्याधिमती, रुदती, पतिघ्नी, सुप्ता, स्तोकायुष्का,
बहिर्गता, कुलटा, अप्रसन्ना, दुःखिता, कलहोद्यता, परिजनोद्वासिन्य-
प्रियदर्शना, दुर्भगेति नैतां वृणीत कन्याम् ॥ १४ ॥
कन्या के दोष निम्नलिखित हैं। इन दोषों से युक्त कन्या विवाह योग्य
नहीं होती।
आंखों की पुतलियां उभरी हुई हों, जांघों में रोएं अधिक हों, पिण्डलियों
में मांस न हो, कमर, नाभि, पेट और दोनों स्तन सुन्दर न हों, बाहों की नसें
Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu