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सर्वकोश
निरुक्तम् (महर्षि यास्क मुनि - निघण्टु एवं वैदिक शब्द-व्युत्पत्ति सान्वय सटीक भाष्य)

निरुक्तम् (महर्षि यास्क मुनि - निघण्टु एवं वैदिक शब्द-व्युत्पत्ति सान्वय सटीक भाष्य)

Niruktam of Maharshi Yaska with Nighantu and Hindi Commentary

महर्षि यास्क मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished1,282 पृष्ठ

पृष्ठ 189, कुल 1282 में से

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पृष्ठ 189

२२ २ अ० १ पा० ४ खं० ।
कम्बलः - कमनीय् होनेसे ही कम्बल कहाता है। क्योंकि-शीतसे
पीड़ित मनुष्यका वह प्रार्थनीय होता है।
दूसरा उदाहरण ।
"दाति" धातु आख्यातकी क्रियाके रूपमें प्राच्य या पूर्वीय
देशोंमे बोला जाना है; जिसका वहां छेदन अर्थ होता है। जैसे-
'ब्रीहीन्दाति'-'धानोंको काटता है। 'यवान् दाति'-'यवोंको
काटता है'। और यही धातु उदीच्य या उत्तरीय देशोंमें विकृति
या नामके रूपमें 'दात्र' ऐसा बोला जाता है। 'दीयते अनेन' इति
दात्रम्। जिससे काटा जाय उसे दात्र कहते है।
जिस प्रकार कम्बोज और आर्य देशोंमें भिन्न भिन्न रूपोंमें पाये
हुए शवति धातुके प्रयोगोंके अर्थानुसन्धानसे उसके अभिधेयकी
स्थिरता होतो है, कि-वहाँ भी जाना अर्थ देता है, और यहाँ भी,-
जिसके प्राण चले गये, उस शरीरको कहते हैं, सर्वथा दोनों देशोंमें
इसका चलना अर्थ है। इससे गति अर्थ सन्दिग्ध है।
तथा 'दाति' धातुका प्राच्य और उदीच्य दोनों देशोंके व्यव-
हारसे लवन या छेदन अर्थ निश्चित होता है, इसी प्रकार अन्य अन्य
जो एक पद या स्वतन्त्र स्वतन्त्र पद हैं (जैसे कि-ऐक पदिक
काण्डमें आवेंगे) उनका लोक और वेदकी व्यवस्थासे या देश-
भाषाओंकी प्रसिद्धिके विभागसे निर्वचन करना।
तद्धित तथा समास युक्तपदोंका निर्वचन ।
जो शब्द तद्धित व समाससे रहित हैं, वे शुद्ध नाम तथा आ-
ख्यातके रूपमें एक एक पद होते हैं, इससे उनकी निरुक्तिमें किसी
क्रम विशेषकी शंका नहीं होती, किन्तु जहां समास व तद्धितका योग
है, वहाँ अनेक अनेक पदोंके मेल होते हैं, इस लिये वहां पर क्रम