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सर्वकोश
नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary

महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished668 पृष्ठ

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शुद्धिपत्र
पृष्ठ पङ्क्ति अशुद्ध शुद्ध
६ ३१ ( स० २० ७-३७, ३८ ) ( स० २० ७-३५, ३६ )
११ ७ स्निग्धा दृष्टा च स्निग्धा हृष्टा च
११ ९ दीना, दृप्ता दीना, क्रुद्धा, दृप्ता
१६ ४ दृष्टिः प्रकीर्तिता ॥६५॥ दृष्टिः प्रकीर्तिता ॥ ६४ ॥
२५ २४ ललितादुत्क्षेपाद् ललितादुत्क्षेपात्
२८ २१ प्राकृतमुच्येते ॥१३६॥ प्राकृतमुच्यते ॥ १३६ ॥
३० ९ विसर्गों रञ्जने तथा ॥१४३॥ विसर्गे रञ्जने तथा ॥ १४३ ॥
३२ ४ मुद्धाद्याक्षिप्तमेव मुद्राद्युत्क्षिप्तमेव
३२ २७ १. क्रोधकृतेत—ग० । १. क्रोधकृतेन—ग० ।
३३ ५ तथा साची भेद तथा साची आदि जो भेद
४० १५ पल्लवा च तथा पल्लवौ च तथा
४१ १ ( ११ ) उत्तानवश्चित, ( ११ ) उत्तानवञ्चित,
४१ ८ चतुष्पष्ठिकरा चतुष्षष्टिकरा
४२ २३ महाजनप्रांशुपुष्कर० महाजनं प्रांशुपुष्कर०
४८ १० एक थोल घुमाव एक गोल घुमाव
४८ २२ मुद्रा द्वारा (जिन कार्यों का मुद्रा द्वारा जिन कार्यों को
४९ १४ सारी अंगुलिय हथेली सारी अंगुलियाँ हथेली में
५० १३ द्वयङ्गुष्ठक निपीडिता द्वाङ्गुष्ठकनिपीडिता
५३ २७ उससे रात्रि की समाप्ति उससे दिन और रात्रि की समाप्ति
५६ २ का इस मुद्रा से आदि का इस मुद्रा से
५७ १० पार्श्वगत-विकीर्णाश्च पार्श्वगता विकीर्णाश्च
५८ २४ बालातुरशठ्यकैतवार्थेषु-ग०। बालातुरशाठ्यकैतवार्थेषु—ग०।
५९ २६ तो डाटना ( निर्भत्सन ) तो डाँटना ( नर्भर्त्सन )
६० ४ अग्रभाग पर हो तथा अग्रभाग पर एक दूसरे से
सटी हुई हो तथा
६४ ३१ ५. अधुना—ख० ५. अधुना—ख०,
६५ २४ हस्तमुद्राएँ सामान्न्यतः हस्तमुद्राएँ सामान्यतः
६६ २२ स्वस्तिकः परिकीर्तित ॥१३४॥ स्वस्तिकः परिकीर्तितः ॥ १३४ ॥
७० २४ प्रयोक्तव्यो विघातने ॥१५२॥ प्रयोक्तव्यो विघातने ॥ १५२ ॥
७७ १४ कंपित करते हुए बदलना । कम्पित करते हुए बदलना ॥ १४३ ॥
७९ १९ ह्यरोमण्डलैनौ स्मृतौ ॥१५६॥ ह्युरोमण्डलिनौ स्मृतौ ॥ १५६ ॥