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सर्वकोश
नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary

महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished668 पृष्ठ

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पृष्ठ 107

( ६६ )
दण्डकविजृम्भित लक्षण २५९
विषम तथा अर्धसमवृत्त
(११९-१२४) २६०
पथ्याआर्या लक्षण-सोदाहरण
(१२५-१२६) २६१
सर्वविषमपथ्या लक्षण सोदाहरण
(१२७-१२८) २६२
विपरीत-पथ्या लक्षण सोदाहरण
(१२९-१३०) २६२
(अनुष्टुप्) चपला लक्षण सोदा-
हरण (१३१-१३२) २६३
(अनुष्टुप्) विपुला लक्षण
सोदाहरण (१३३-१३५) २६३
आर्याविवरण (१३६-१३७) २६४
पथ्यावक्त्र लक्षण उदाहरण
(१३८-१४०) २६४
वानवासिका लक्षण उदाहरण
(१४१-१४२) २६५
केतुमती लक्षण उदाहरण
(१४३-१४४) २६५
अपरवक्त्र लक्षण उदाहरण
(१४५-१४६) २६६
पुष्पिताग्रा लक्षण उदाहरण
(१४७-१४८) २६६
उद्गता लक्षण उदाहरण (१४९-१५०) २६७
ललिता ,, ,, (१५१-१५५) २६७
पञ्चआर्या (१५६-१६३) २६८
पथ्या-विपुलाआर्या लक्षण उदाहरण
(१६४-१६५) २७१
चपला आर्या लक्षण उदाहरण
(१६६-१६७) २७२
मुखचपला-जघनचपला लक्षण
उदाहरण (१६८-१७१) २७२
सर्वचपला लक्षण उदाहरण (१७२) २७३
आर्या-प्रस्तारादि-विवरण
(१७३-१७९) २७३
सप्तदश अध्याय
(काव्यलक्षणालङ्कारादि)
(श्लोक १-१२१)
लक्षण उद्देश्य कथन (१-५) २७५
भूषण-लक्षण (६) २७६
अक्षरसंघात लक्षण (७) २७६
शोभा ,, (८) २७६
उदाहरण ,, (९) २७७
हेतु ,, (१०) २७७
संशय ,, (११) २७७
दृष्टान्त ,, (१२) २७८
प्राप्ति ,, (१३) २७८
अभिप्राय ,, (१४) २७८
निदर्शन ,, (१५) २७८
निरुक्त ,, (१६) २७९
सिद्धि ,, (१७) २७९
विशेषण ,, (१८) २७९
गुणातिपात ,, (१९) २८०
अतिशय ,, (२०) २८०
तुल्यतर्क ,, (२१) २८०
पदोच्चय ,, (२२) २८०
दिष्ट ,, (२३) २८१
उपदिष्ट ,, (२४) २८१
विचार ,, (२५) २८१
विपर्यय ,, (२६) २८२
अंश लक्षण (२७) २८२
अनुनय ,, (२८) २८२
माला ,, (२९) २८२
दाक्षिण्य ,, (३०) २८३
गर्हण ,, (३१) २८३
अर्थापत्ति ,, (३२) २८३
प्रसिद्धि ,, (३३) २८४
पृच्छा ,, (३४) २८५
सारूप्य ,, (३५) २८४
मनोरथ ,, (३६) २८४
लेश ,, (३७) २८५