नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
DevanagariHindipublished309 पृष्ठ
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चेटी - राजकुमारी, अभी 'वर' शब्द के उच्चारण से ही उत्पन्न हुई
इस घबराहट से (आपने सब कुछ) कह दिया है । अतः (और
अधिक) सन्तप्त न हो । यदि मैं (सचमुच) चतुरिका हूँ तो वह
भी आप को देखे बिना क्षण भर भी (कहीं) आनन्द नहीं ले
सकेगा । यह भी मैंने देख लिया है ।
नायिका- (आंसुओं के साथ) हमारे इतने भाग्य कहाँ ?
चेटी - राजकुमारी, ऐसा न कहो । क्या भगवान् विष्णु छाती पर
लक्ष्मी को उठाए बिना सुखी हो सकते हैं ?
नायिका- क्या मित्रजन प्रिय बातों को छोड़ अन्य कुछ बोलना (भी)
जानते हैं ? सखी, इसलिए भी मेरा सन्ताप और अधिक
- निर्वृत्तः = सुखी, शान्त ।