नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
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मैं भी जाकर राजकुमारी को सूचना देती हूँ कि चन्द्रमणि
शिलातल तैयार है।
(दोनों चली जाती हैं)
[प्रवेशक समाप्त]
[उत्कण्ठित मलयवती और चेटी का प्रवेश]
मलयवती— (गहरी सांस लेकर, मन ही मन) हे हृदय ! उस समय
उस (प्रिय से) लज्जावश मुझे पराङ्मुख करके अब तू स्वयं
वहीं (उसके पास) चला गया है। अहो, तेरी स्वार्थपरता !
(प्रकट) सखि चतुरिका ! भगवती (गौरी) के मन्दिर का मार्ग
दिखा।
चेटी —(मन ही मन) चली तो थी चन्दनलतागृह को, पर कहती है
'देवी के मन्दिर का मार्ग' । (प्रकट) राजकुमारी, आप तो
चन्दनलतागृह की ओर चली थीं ।