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नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished309 पृष्ठ

पृष्ठ 73, कुल 309 में से

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पृष्ठ 73

( ३६ )
नायक— हे बड़ी बड़ी चञ्चल आंखों वाली ! सांस लेने से कांपते हुए
स्थूल तथा घने स्तनों वाली ! तुम्हारा यह शरीर तपस्या से
ही काफ़ी थक चुका है ; तो हे घबराई हुई ! फिर इसे और
कष्ट क्यों देती हो ?
नायिका— (अलग) सखी ! अत्यन्त घबराहट के कारण मैं इस के
सामने नहीं ठहर सकती ।
[नायक को तिरछी आंखों और लज्जा से देखती हुई मुख को
कुछ फेर कर खड़ी रहती है]
चेटी— राजकुमारी ! यह क्या ?
नायिका— सखी, मैं इस के समीप नहीं ठहर सकती । तो, आओ
कहीं और चलें । (यह कह कर उठना चाहती है)
विदूषक— अरे, यह तो डरती है । मैं अपनी पढ़ी हुई विद्या के समान
इसे पल भर रोक सकता हूँ ।
नायक - क्या हर्ज है ?

  1. अलम् = बहुत; अत्यन्त; काफ़ी; पर्याप्त ।