नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
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( २६ )
इस गीत में वीणा बजाने के दश प्रकार के तरीकों से स्पष्ट
प्राप्त हुई है। द्रुत, मध्य तथा विलम्बित तीनों प्रकार के लय
भी स्पष्ट प्रतीत हो रहे हैं। क्रम से गोपुच्छा आदि तीनों
यतियां भी (यथा स्थान) रखी गई हैं। और तत्त्व, ओघ
तथा अनुगत नामक तीनों वाद्य-विधियां भी भली प्रकार से
(इसके वीणा वाद्य में) दिखाई गई हैं।
चेटी— (प्रेम पूर्वक) भर्तृदारिके (राजकुमारी) ! बहुत देर से आप
वीणा बजा रही हैं। क्या आप की अंगुलियां थक नहीं गईं ?
नायिका— (झिड़कती हुई) अरी चतुरिका ! देवी के आगे वीणा बजाने
से मेरी अंगुलियों को थकावट कहाँ ?
चेटी— राजकुमारी ! मैं तो कहती हूं कि इस दयाहीन (देवी) के आगे
वीणा बजाने से क्या लाभ ? जो इतने दिनों तक (अन्य)
- द्रुत = तेज़; मध्य = दरमियानी ; लम्बित = धीमी
- विराम। 3. वीणा बजाने के तरीके।
- अग्रहस्तं = अंगुलियां।