नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
DevanagariHindipublished309 पृष्ठ
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चेटी — (मुस्कराते हुए, विदूषक से) क्या तुम ने सुना किस प्रकार
राजकुमारी का वर्णन किया गया है।
विदूषक — (मुस्कराते हुए) चतुरिका ! इस प्रकार गर्व न कर । हमारे
बीच भी सुन्दर व्यक्ति है। केवल ईर्ष्या से कोई (उसका)
वर्णन नहीं करता ।
चेटी — (मुस्कराते हुए) आर्य ! मैं आप का वर्णन (गुणों की प्रशंसा,
अथवा, रंगना) करती हूँ।
विदूषक — (हर्षपूर्वक) श्रीमति, मानों मैं जी पड़ा। अतः मुझ पर
कृपा कीजिए जिस से यह फिर मुझे यह न कह सके कि
'तू ऐसा है, वैसा है, भूरे बन्दर की शक्ल वाला है'
इत्यादि ।
चेटी — आर्य ! विवाह में जागरण के समय आँखें बन्द कर के ऊंघते
हुए आप मुझे बड़े सुन्दर दिखाई दे रहे थे। अतः उसी
अवस्था में बैठे रहो ताकि मैं वर्णन करूं ।
- 'वर्णयामि' के दो अर्थ हैं। विदूषक इस का 'गुणों की प्रशंसा'
अर्थ लेता है। परन्तु चेटी 'रंगना' अर्थ में इस का प्रयोग
करती है। - मेरी जान में जान आ गई।