नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
DevanagariHindipublished309 पृष्ठ
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तीसरा अङ्क
[मस्त, विचित्र तथा विह्वल (अटपट) वेष धारण किए हुए, हाथ में
शराब का प्याला लिए हुए विट और कन्धे पर शराब का
मटका रखे चेट का प्रवेश ]
विट — जो नित्य शराब पीते हैं वह बलदेव, और जो लोगों को अपने
प्रियजनों से मिलाते हैं वह कामदेव — ये दोनों ही मेरे (पूज्य)
देवता हैं ।
(झूमते हुए) सचमुच मुझ शेखरक का जीवन सफल है :—
जिसकी छाती पर प्राणप्यारी, मुख में नील कमलों से सुवासित
शराब और सिर पर फूलों का मुकुट नित्य रहते हैं । (लड़खड़ाते
हुए) अरे ! मुझे कौन हिला रहा है ? ( प्रसन्नता के साथ )
जरूर नवमालिका मुझ से हंसी कर रही है ।
- विह्वल = बिखरी हुई, अटपटी ( वेष भूषा )
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