मूलमध्यमककारिका (आचार्य नागार्जुन - चन्द्रकीर्ति प्रणीत प्रसन्नपदा व्याख्या सहित)
Mulamadhyamakakarika of Nagarjuna with Prasannapada Commentary
आचार्य नागार्जुन (टीकाकार: आचार्य चन्द्रकीर्ति) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें-र्थः" -> प-रि-भो-ग-ा-न्व-य-म-ि-त्य-र्थः ॥
Wait, does it have an extra म? No, "परिभोगान्वयमित्यर्थः ।"
Then: "तद्यथा देवकुलादिप्रतिष्ठापनम्, यत्र"
Line 14:
सत्त्वा हन्यन्ते । यथा यथा हि तत्कीर्तौ प्राणिनो हन्यन्ते, तथा तथा तद्देवकुलाद्युपभोगात् तत्कर्तॄणां
Wait, "तत्कीर्तौ" or "तत्तीर्थे"?
Look at line 14:
"य-था य-था हि त-त्की-र्त्तौ" or "त-त्ती-र्थे"?
Wait! देवकुलादिप्रतिष्ठापनम् यत्र सत्त्वा हन्यन्ते।
Is it तत्कीर्तौ? त-त्की-र्त्तौ: त, त्की with ī-kāra, r-repha, au-kāra?
Wait, look at the letters:
त (ta)
त्की (tkī) or त्ती (ttī)?
It has an upper horizontal stroke: त्ती! Then र्थे!
Wait, is it "तत्तीर्थे" (tat-tīrthe)?
Look at the top: it has a repha and an e-kāra or au-kāra?
Wait, look at line