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सर्वकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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पृष्ठ 95

८८ मुकुन्दमाल
त्वच्छेषत्वज्ञानमु लेकुन्नारु. नी कृपनु सम्पादिम्पकुन्नारु. ज्ञानमु
सम्पादिञ्चलेदु. भगवद्भक्त्यादि साधनमुलनु सम्पादिञ्चलेनिवारितो
गूडिन दगुट चेत ई लोकमु चेदियुन्नदि. दीनिनि नाकु चूप
कुडु. (नम्माऴ्वारु वण्टिवारे यिट्लु दुष्टसहवासमुनकु भीतिल्लिरि.
कुलशेखरुलुनु क्षीणपुण्युलनु चूपकु डनिरि).
स्वामि : अयोग्युलनु चूपुपक्षमुन कोट्टुदुरा? गिल्लुदुरा?
कुलशेखरुलु : भक्तुलुग नुण्डुवारितो वारु चेदुनट्लु माट्लाडु
दुरु.
स्वामि : एट्लु माट्लाडुदुरु?
कुल : यज्ञमाचरिञ्चुट स्वर्गमु पोन्दुतया? निच्चेन
येमैना नुन्नदा? अग्निलो नेयि वेसिन स्वर्गमु
वच्चुना? अनि ई रीतिग वचिन्तुरु. निजमे गदा
अनि तोचुनु. नास्तिकवादुलु बहुचमत्कारमुग
माट्लादुदुरु.
भोगैश्वर्यप्रसक्तानां तयापहृत चेतसाम्,
व्यवसायात्मिकाबुद्धि स्समाधौ न विधीयते.
-- गीत. २.४४श्लोकमुट्लु वारि माटल
वलन चेदुदुरु.
या मिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः,
वेदवादरताः पार्थ नान्यदस्तीति वादिनः.
-- गीत. २.४२.
वारि माटलु पुष्पसदृशमुग नुण्डुनु. आ माटलु बुद्धि
नीड्चुनु.
श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला,
समाधा वचलाबुद्धि स्तदा योग मवाप्स्यसि.
-- गीत. २.५३श्लोकमुट्लु एकाग्रबुद्धितो