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सर्वकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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86 मुकुन्दमाल
अनु श्लोकमुन अर्जुनुडु स्वामि! नीवु अन्नि वस्तुवुललोनु
व्यापिञ्चियुन्नावु. कान अन्नियु अगुचुन्ना वनेनु. नीवु शरीरिवि.
अन्नियुनु नी शरीरमु.
अहं क्रतु रहं यज्ञः स्वधाऽह मह मौषधम्,
मन्त्रोऽह महमे वाज्य महमग्नि रहं हुतम्.
-- गीत. 9.16
अनु श्लोकमुन नेने यज्ञमु, नेने महायज्ञमु, नेने स्वध अनि
यीरीति अन्नियुनु नेने यनि चेप्पितिरि.
क्षेत्रज्ञं चापि मां विद्धि सर्वक्षेत्रेषु भारत,
क्षेत्रक्षेत्रज्ञयो र्ज्ञानं यत्तत् ज्ञानं मतं मम.
-- गीत. 13.3
क्षेत्रक्षेत्रज्ञुलु ना शरीरभूतमु शेषभूतमु अनि पल्कितिरि.
नान्तोऽस्ति मम दिव्यानां विभूतीनां परन्तप,
एष तूद्देशतः प्रोक्तो विभूते र्विस्तरो मया.
-- गीत. 10.40
अन्न श्लोकमुन ना महिमलकु अन्तमु लेदंटिरि. आ या
कारणमुलचेत नन्नियुनु नीवे यगुचुन्नावु.
स्वामि : नावलन नेमि कावलयुनु?
नम्मा : नन्नु मीवद्दकु तीसिकॊनिपोंडु.
स्वामि : ई लोकमुन भागवतु लुन्नारु. इंकनु कॊन्नि दिनमु
लुंडवच्चुनु. गॊप्पस्थितियं दुण्डुवारु वैकुण्ठमुन
नुंडिननेमि, ई लोकमुन नुंडिन नेमि?
नम्मा : स्वामि! इन्द्रियमुुलनु मनस्सुनु सरिपऱचितिरि. शरी
रमु पाञ्चभौतिक मगुटचेत व्याधुलु वच्चुनु. मुस
लितनमु वच्चुनु.