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सर्वकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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मुकुन्दमाल 135
माट्लाडुवारु कारु .गान नित्यसूरुलुनु साक्षुलु. लक्ष्मीनारायणुलु
चदरंग माडुट नितरुलु चूडवच्चुना यनिन वेदमुलनु स्त्रीलिं-
गमुगनु, नित्यसूरुलनु नपुंसक लिंगमुगनु कवि वर्णिंचुट चेत
वारुंड वच्चुनु. ई चदरंग माडुवारु कायल नेत्ति पेट्टुनट्लु
ब्रह्मादुलनु गूड मार्चुचुंदुरु. लक्ष्मीनारायणुल कोक लील
यिदि. इट्टि लक्ष्मि स्वामिभार्य. चराचर प्रपंचमुनु सृजिंचु
ब्रह्मदेवु डीतनि कोडुकु.
स्वामि : एदो चिन्न ग्रंथमुलंदु स्तुतिंपबडिन दानिनि चूचि .
नन्नु घनुडनि तलंपनगुना?
कुल : स्वामी! अपौरुषेयमुलैन वेदमुले निन्नु प्रस्तु-
तिंचुचुन्नवि. नी पनिवारु देवतलु. साधारण
प्रभुनि వలన स्वल्पफलमु लभिंचुनु. नी प्रसा-
दमुवलन सकलानर्धमुलु तोलगि मुक्ति कलुगुनु.
नी सामर्थ्यमुनु जूपवलयु ननिन अनंत कोटि
ब्रह्मांडमुलनु सृष्टिंचेदवु. इट्टि नी युनिकि वैकुं-
ठमयिननु, नी सौलभ्यमुनु देलुपुचु भूलोकमुन
नवतरिंचितिवि. नी तल्लि देवकि. अर्जुनुडु नी चेलिकाडु.
अतनिकि सारथ्यमु चेसितिवि. आ संगति शाश्वतमुग
लोकमुन नेगडियुंडुटकु पार्थसारथि पेरुपेत्तु-
कोनि नी भक्तवात्सल्यमुनु वेल्लडिंचितिवि. ई संगति
तप्प मऱियॊकटि ने नेऱुगनु.
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कृष्णो रक्षतु नो जगत्त्रयगुरुः कृष्णं नमस्या म्यहं
कृष्णे नामरशत्रवो विनिहताः कृष्णाय तस्मै नमः,
कृष्णादेव समुत्थितं जगदिदं कृष्णस्य दासोऽस्म्यहं
कृष्णे तिष्ठति सर्वमेत दखिलं हे कृष्ण रक्षस्व माम्.