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मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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पृष्ठ 71

६२ मुहूर्त्तचिन्तामणि
होनेवाली संक्रान्ति मेढ़े पर सवार, कम्बल धारण किये, अंकुश हाथ में
लिये, मधु का भक्षण करती हुई, सुरमा का लेप देह में लगाये, वैश्य-
जातिवाली, चमेली के फूल हाथ में लिये होती है। नाग करण होने-
वाली संक्रान्ति बैल पर सवार, नंगी, अस्त्र हाथ में लिये, घी का भक्षण
करती हुई, अगर का लेप देह में लगाये, शूद्रजातिवाली, पाढरि का
फूल हाथ में लिये होती है। किंस्तुघ्न करण में होनेवाली संक्रान्ति चरणा-
युध अर्थात् मुर्ग पर सवार, मेघ के समान वस्त्र धारण किये, बाण हाथ में
लिये, शक्कर का भक्षण करती हुई, कपूर का लेप देह में लगाये, वर्णसंकर-
जातिवाली, गुड़हर का फूल हाथ में लिये होती है। जिस महीने की संक्रान्ति
के जो वाहन, वस्त्र, भक्षणादि कहे हैं, उस महीने में उन सबका नाश
अथवा उन वस्तुओं से जीविका करनेवालों का नाश होता है। संक्रान्ति
करते समय सूर्य की सुप्त, उपविष्ट और स्थित, ये तीन अवस्थाएँ कही हैं,
उन अवस्थाओं में वर्तमान अर्थात् सोते हुए, बैठे हुए और खड़े हुए प्राणियों
का भी नाश होता है ॥ १४-१७ ॥
संक्रान्तिवश से शुभाशुभ फल
संक्रान्तिधिष्ण्याधरधिष्ण्यतस्त्रिभे स्वभे निरुक्तं गमनं ततोऽङ्गभे ।
सुखं त्रिभ पीडनमङ्गभेंऽशुकं त्रिभेऽर्थहानी रसभे धनागमः ॥ १८ ॥
अन्वयः—संक्रान्तिधिष्ण्याधरधिष्ण्यतः त्रिभे स्वभे गमनं निरुक्तम्, ततः अङ्गभे
सुखम्, (ततः) त्रिभे पीडनम्, (ततः) अङ्गभे अंशुकम्, (ततः) त्रिभे अर्थहानिः, (ततः)
रसभे धनागमः (स्यात्) ॥ १८ ॥
संक्रान्ति जिस नक्षत्र में हो उसके पूर्वनक्षत्र से जन्मनक्षत्र तक गिने ।
यदि प्रथम तीन नक्षत्रों में से जन्मनक्षत्र हो तो कहीं जाना पड़े, चौथे से
लेकर छः नक्षत्रों में हो तो सुख, दशवें से लेकर तीन नक्षत्रों में शरीरपीड़ा,
तेरहवें से लेकर छः नक्षत्रों में वस्त्र की प्राप्ति, उन्नीसवें से लेकर तीन
नक्षत्रों में द्रव्यादि की हानि और बाइसवें से लेकर छः नक्षत्रों में धन की
प्राप्ति होती है ॥ १८ ॥
संक्रान्ति के नक्षत्र से जन्मनक्षत्र चक्र
| ३ | ६ | ३ | ६ | ३ | ६ |
| गमन | सुख | व्यथा | वस्त्रप्राप्ति | हानि | धनप्राप्ति |