मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंक्रान्तिप्रकरण ६१
वाहनादेः तद्वृत्त्युपजीविनां च नाशः (स्यात्), च (तथा) स्थितोपविष्टस्वपतां नाशः
(स्यात्) ॥ १४-१७॥
बवादि सात चर और शकुनि आदि चार स्थिर मिलकर ग्यारह करणों
में होनेवाली सूर्य संक्रान्तियों के क्रम से सिंहादि वाहन, श्वेतादि वस्त्र,
भुशुण्डी आदि आयुध, अन्नादि भक्ष्य, कस्तूरी आदि लेपन, देवतादि जाति
और पुन्नागादि पुष्प होते हैं। बव करण में होनेवाली संक्रान्ति सिंह पर
सवार, श्वेतवस्त्र धारण किये, भुशुण्डी हाथ में लिये, अन्न का भक्षण
करती हुई, कस्तूरी का लेप देह में लगाये, देवताजातिवाली, नागकेसर
का फूल हाथ में लिये होती है। बालव करण में होनेवाली संक्रान्ति
व्याघ्र पर सवार, पीले वस्त्र धारण किये, गदा हाथ में लिये, खीर भक्षण
करती हुई, कुंकुम का लेप देह में लगाये, भूतजातिवाली, चमेली का
फूल हाथ में लिये होती है। कौलव करण में होनेवाली संक्रान्ति वराह पर
सवार, हरे वस्त्र धारण किये, तलवार हाथ में लिये, भीख माँगने से मिले
हुए अन्नादि का भक्षण करती हुई, लाल चन्दन का लेप देह में लगाये
सर्पजातिवाली, मौलसिरी का फूल हाथ में लिये होती है। तैतिल करण
में होनेवाली संक्रान्ति गधे पर सवार, थोड़ा पीला वस्त्र धारण किये, दण्ड
हाथ में लिये, पुआ आदि पक्वान्न का भक्षण करती हुई, मिट्टी का लेप देह
में लगाये, पक्षीजातिवाली, केतकी का फूल हाथ में लिये होती है। गर
करण में होनेवाली संक्रान्ति हाथी पर सवार, लाल वस्त्र धारण किये,
धनुष हाथ में लिये, दूध का भक्षण करती हुई, गोरोचन का लेप देह में
लगाये, पशुजातिवाली, बेल का फूल हाथ में लिये होती है। वणिज
करण में होनेवाली संक्रान्ति भैंसे पर सवार, श्याम रंग वस्त्र धारण किये,
तोमर हाथ में लिये, दही का भक्षण करती हुई, महावर का लेप देह में
लगाये, मृगजातिवाली, मदार का फूल हाथ में लिये होती है। विष्टि
करण में होनेवाली संक्रान्ति घोड़े पर सवार, काला वस्त्र धारण किये,
बरछी हाथ में लिये, चित्रान्न अर्थात् एक में पके हुए चावल, मूँग, मसूर,
हलदी का भक्षण करती हुई, बिलार के पसीने का लेप देह में लगाये,
ब्राह्मणजातिवाली, दूब हाथ में लिये होती है। शकुनि करण में होनेवाली
संक्रान्ति कुत्ते पर सवार, अनेक रंगवाला वस्त्र धारण किये, पाश हाथ में
लिये, गुड़ का भक्षण करती हुई, हलदी का लेप देह में लगाये, क्षत्रिय
जातिवाली, कमल का फूल हाथ में लिये होती है। चतुष्पद करण में