मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
आप तो जाय द्वारिका छाये, हम कूँ लिख दिया जोग ।
मीराँ कहै प्रभु गिरिधर नागर, पिछले जनम का कोल ।
इस पाठ पर ब्रज भाषा का प्रभाव स्पष्ट है ।
पाठान्तर २,
गिरिधर, दुनियाँ दे छै बोल ।
गिरिधर मेरा मै गिरिधर की, कहो तो बजाऊ ढोल ।
आप तो जाय द्वारिका छाये, हम कूँ लिख दियो जोग ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, पिछले जनम का कोल ।
उपर्युक्त तीनो पदो पर विचार करने से यह स्पष्ट हो जाता है कि
इन प्रथम दोनो पाठो का सम्मिश्रण ही इस पाठ विशेष का आधार है ।
७
अपने करम को छै दोस, काकूँ दीजै उधो ।
सुणियो मेरी भैण¹ पडोसण, गैले² चालत लागी चोट ।
पहली मै ग्यान मान नही कीनो, मै ममता की बाँधी पोट ।
मे जाणूं हरि नाहि तजैंगे, करम लिख्यो भलि पोच ।
मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, परो निवारोनी सोच ॥३५॥†
पद की द्वितीय पक्ति मे प्रयुक्त "भैण" शब्द के बदले "बग्गड'
शब्द का ही प्रयोग मिलता है ।
पदाभिव्यक्ति से पश्चाताप ही प्रकट होता है । इस भावना का
द्योतक पद यही एक है ।
पाठान्तर १,
अपणां करम ही का खोट, दोष काँई दीजै री आली ।
सुणजो री मेरी सग की सहेली, बाट चलत लागी चोट ।
१ बहन, २ रास्ता।