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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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पृष्ठ 92

वियोगाभिव्यक्ति ३३
५
थाँने काँई काँई १ कह समझावूँ, म्हाँरा बाल्हा गिरधारी ।
पूरब जनम की प्रीति हमारी, अब नही जात निवारी २ ।
सुन्दर बदन जोवते सजनी, प्रीत भई छै भारी ।
म्हाँरे घर पधारो गिरधारी, मगल गावै नारी ।
मोती चोक पुराऊँ बाल्हा ३, तन मन तो पर वारी ।
म्हाँरा सगपण ४ तोसूँ साँवलिया, जुग सो नही बिचारी ।
मीराँ कहै गोपिन को बाल्हो, हमसूँ भयो ब्रह्मचारी ।
चरन सरन है दासी तुम्हारी, पलक न कीजै न्यारी । ॥३३॥
पद मे व्यक्त की गयी भावना विशेष ध्यान देने योग्य है। इस भाव
को प्रदर्शित करने वाला यह पद अपनी तरह का एक ही है। मीराँ के
पदो मे प्राय प्राप्त टेक परम्परा (मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर) भी
इसमे नही है।
सम्पूर्ण पद की राजस्थानी भाषा को देखत हुए अन्तिम पक्ति
मे प्रयुक्त "तुम्हारी" शब्द के बदले "थॉरी" शब्द का होना अधिक
युक्ति युक्त प्रतीत होता है।
६
गिरिधर, दुनियाँ दे छै बोल ।
गिरिधर म्हाँरे मै गिरिधर की, कहो तो बजाऊँ ढोल ।
आप तो जाय विदेसाँ छाये, हमको पड गयो झोल ५ ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, पिछले जनम के कोल ६ । ॥३४॥
पाठान्तर १,
गिरिधर, दुनियाँ दे छै बोल ७ ।
दुनियों क्यो दे बोल, ये करमन के भोग ।
१ क्या-क्या, २ हटाई, ३ बालम, ४. ब्याह द्वारा हुए सबध
५ अनिश्चित परिस्थिति, ६ बचन, ७ ताने ।
३