मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२ मीराँ-बृहत्-पद-संग्रह
११
भाभी मीराँ ! कुल ने लगायी गाल, ईंडर गढ़ ते आया ओलमा¹ ।
बाई ऊदाँ ! थॉरे म्हॉरे नातो नाहि, बासो बस्या का आया जी ओलमा ।
भाभी मीराँ ! साधॉ को सग निवारि, सारो सहर थॉरी निन्दा करै ।
बाई ऊदाँ करे तो पड़या झख मारो, मन लाग्यो रमता राम सूँ ।
भाभी मीराँ पहरो नी मोत्या को हार, गहणो पहर्यो रतन जडाव को ।
बाई ऊदाँ छोड़यो मोत्यां को हार, गहणो तो पहर्यो सील सन्तोष को ।
भाँभी मीराँ ! औरॉ के आवे छै आच्छी² रूढी जान,
थॉरे आवे हरिजन पावनॉ ।
बाई ऊदाँ चौबसियां³ झाँक, साधॉ को मडल लागे सुहावणो ।
भाभी मीराँ ! लाजे गढ चितौड, राणो जी लाजै गढ़ रा राजबी ।
बाई ऊदाँ ! तार्यो तार्यो चित्तौड, राणा जी तार्या गढ रा राजवी ।
भाभी मीराँ ! लाजै लाजै थाँरू मायड बाप, पीहर लाजै जी मेडतो ।
बाई ऊदाँ ! तार्या म्हें तो मायड बाप, पीहर तार्यो जी मेडतो ।
भाभी मीराँ ! राणा जी कियो छै थां पर कोप, रतन कचोले विष घोलियो।
बाई ऊदाँ ! घोल्यो तो घोलवा द्यो कर, चरणामृत वो ही म्हू पीवस्यां ।
भाभी मीराँ ! देखतड़ा ही मर जाय, विष तो कहिए बासक नाग को ।
बाई ऊदाँ ! नही म्हारे माय र बाप, अमर डाली धरती झेलिया ।
भाभी मीराँ ! राणा उभा छै थारे द्वार, पोथी मागें छै थारे ज्ञान की ।
बाई ऊदाँ ! म्हारी खाँड़ा री धार, ज्ञान निभावन राणा छै नही ।
भाभी मीराँ ! राणा जी रो बचन न लोप, उन रूठ्यां भीड़ी कोऊ नहीं ।
बाई ऊदाँ ! रमापति आवे म्हारी भीड़, अरज करूं छूँ तांसू बीनती ॥११॥
१२
भाभी मीराँ हो साधा को संग निवारि,
थारी लोक निन्दा करै ।
१ शिकायत, २ भली सुन्दर, ३ बरॉमदा ।