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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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पृष्ठ 73

१४ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
साचाँ साहिब जी यो दुख सह्यो न जाई,
हीवडो तो सुमर भर्चो
सांचा साहिब जी बिदद री लाज,
कर जोडे मीराँ बिनती करै ॥१२॥ †
उपर्युक्त पद मे कुम्भा जी तथा दूदा जी का नाम आया है, यह
विचारणीय है। ऐसे पदो से यही स्पष्ट हो जाता है कि मीराँ का विवाह
“कुँवर” से नही अपितु “राणा” से ही हुआ था, परन्तु यही एक पद
ऐसा है जिसके आधार पर यह राणा कौन थे, इस पर प्रकाश पडता
है। पद की पक्ति “राणा जी रा बाघेला ...... मेडती” विशेष
महत्वपूर्ण है। इस अभिव्यक्ति के आधार पर कहा जा सकता है कि
मीराँ तक जहर का प्याला पहुँचाने वाले राणा के बाघेला सरदार ही
थे। पद विशेष विचारणीय है।
१३
ऊदाँ : माया थे क्यूँ रे तजी भाभी मीराँ, क्यूँ रे लियो बैराग,
काईं थारे मन बसी ।
मीराँ : याही म्हारे मन बसी ऊदाँ, यूँ लियो बैराग,
माया यूँ रे तजी ।
ऊदाँ . ऊचा नीचा बेसणा ये भाभी उत्तम तिहारी जात,
राणा सो वर पाइयो हे भाभी, नो कूँटाँ१ में थांरो राज ।
मीराँ : ऐसा तो मोती ओस का ये बाई, जैसी यो संसार,
लगै झकोलो पोन को ये बाई, छिन मे सब ढल जाय ।
ऊदाँ: खीर खांड को भोजन जीमो भाभी, ओढ़ो दिखनी चीर२ ।
राणा सो वर पाइयो थे भाभी, सब मह लाय थांरो सीर ।
१ कोना, दिशा, २ दिखनी चीर . दक्षिण से आया हुआ वस्त्र। राजस्थान
में इसको अति उत्तम और सुन्दर माना जाता है। अपनी बहुमूल्यता के कारण
यह राजघराने के ही उपयुक्त पड़ता है। अतः यह शब्द सुन्दर और कीमती
वस्त्र के लिए रूढ़ि रूप हो गया।