मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २८५
जमुना के नीरे तीरे धेनु चरावै, बसी मे गावै मीटी बानी ।
तन मन धन गिरिधर पर बारूँ, चरण कवल माही लपटानी ।
२
आजु मै देख्यो गिरधारी ।
सुन्दर बदन मदन की शोभा, चितवन अनियारी ।
बजावत वशी कुज मे ।
गावत ताल तरग रंग ध्वनि, नाञ्चत ग्वाल गन मे ।
माधुरी मूरति वह प्यारी ।
बसि रहै निस दिन हिरदै बिच, टरै नही टारी ।
वाही पर तन मन हो वारी ।
वह मूरति मोहनि निहारत, लोक लाज डारी ।
तुलसी बन कुंजन सचारी ।
गिरिधर नवल नटनागर मीराँ बलिहारी ॥ ५११ ॥
३
प्यारी मै ऐसे देखे श्याम ।
बाँसुरी बजावत गावत कल्याण ।
कब की ठाढी भैयाँ, सुध बुध भूल गैयाँ ।
छौने जैसे जादू डारा, भूले मोसे काम ।
जब धुन कान पैयाँ, देह की ना सुध सैयाँ ।
तन मन हर लीन्हो, विरहो वाले कान्ह ।
मीराँ बहि प्रेम पाया, गिरिधर लाल ध्याया ।
देह सो विदेह भैयाँ, लागो पग ध्यान ॥५१२॥†
उपर्युक्त पद मे तीन विभिन्न बोलियो का सम्मिश्रण विचारणीय
है । पद की भाषा प्रमुखत ब्रज है तथापि क्रियापदो पर पजाबी प्रभाव
स्पष्ट है । “मै ऐसे देखे श्याम”, “पाया” आदि प्रयोगो से आधुनिक
प्रभाव भी स्पष्ट हो उठता है । निम्नाकित एक और पद ऐसा मिलता
है जिसकी प्रथम पक्ति उपर्युक्त पद की प्रथम पक्ति का पाठान्तर
प्रतीत होती है, परन्तु शेष पद सर्वथा विभिन्न पडता है ।