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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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२८६ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
४
कही ऐसे देखे री घनश्याम ।
मोर मुकुट पीताम्बर सोहै, कुडल झलकन काना ।
साँवरी सूरत पर तिलक बिराजे, तिस मे लगे रहे मेरे प्राना ।
बरसाने सो चली गुजरिया, नन्दग्राम को जाना ।
आगे केशव धेनु चरावे, लगे प्रेम के बाना ।
सागर सूखि कमल मुरझाना, हंसा किया पयाना ।
भौरे रह गये प्रीति के धोखे, फेर मिलन को जाना ॥५१३॥†
इस पद मे कही से भी यह स्पष्ट नही होता कि यह पद किस के
द्वारा बनाया गया है, तथापि तथाकथित मीराँ क पदसंग्रहो मे प्राप्त
हैं। पदाभिव्यक्ति स्पष्ट ही अर्थहीन है।
५
बाँके साँवरियाँ ने घेरि मोहि आन के।
जो गई जमुना जल भरन, मारग रोक्यो मेरो आन के ।
वृन्दाबन की कुज गलिन मे मुरली बजावे, आन तान के ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, प्रीत पुरातन जान के ॥५१४॥†
६
भई हो बावरी सुन के बाँसुरी ।
श्रवण सुनत गोरी सुध बुध बिसरी, लगी रहत तामे मनकी बाँसुरी ।
नेम धरम कोन कीनी मुरलिया, कौन तिहारे पासुरी ।
मीराँ के प्रभु वश कर लीन्हे, सप्त ताननि की फाँसुरी॥५१५॥†
पद की तृतीय पंक्ति का शेष पद से समन्वय नही होता ।
७
मुरलिया बाजे जमुना तीर ।
मुरलि सुनत मेरो मन हरि लीन्हों, चीत धरत नही धीर ।
कारो कन्हैया, कारी कामरिया, कारो जमुना को नीर ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, चरण कमल पै सीर ॥५१६॥†