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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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२८४ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
३
काहानो माग्यो दे,धुतारो माग्यो दे,वर तो राधानो,मने कहानो माग्यो दे।
वृन्दारे वनमाँ जेदी रास रम्याँ, ता सोल से गोपी माँ घेलो कहान।
हाथी ने घोडा बाई माल खजाँना, हैया केरो हार ले मान।
तल भर जव भर वछो नव कीधो, जवे तोली ने पाछो ले।
बाई मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, चरण कमल मे चित दे ॥५०९॥†
बाँसुरी वर्णन
ब्रजभाषा में प्राप्त पद
१
कान्हा रसिया वृन्दाबन बासी।
जमुना के नीरे तीरे धेनु चरावे,मुरली बजावे मृदुलासी।
मोर मुकुट पीताम्बर सोहै, श्रवण कुडल फलासी।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, बिना मोल की दासी ॥५१०॥
पाठान्तर १,
म्हारी बालपना की परीति थे निभाज्यो रैना।
जमुना के नीराँ तीराँ धेनु चरावै, कुडल झलकत काना।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, हर नौ माह रो धाना।
यह पद उपर्युक्त पद का गेय रुपान्तर मात्र प्रतीत होता है, क्योकि
प्रथम पंक्ति के सिवा सम्पूर्ण पद की भाव और भाषा भी लगभग
एक ही है। विभिन्न स्थानो पर प्रचलित होने के कारण स्थानीय
बोलियो का प्रभाव पदो से स्पष्ट होता है।
पद की भाषा पर राजस्थानी प्रभाव स्पष्ट है। इस रूपान्तर की
अभिव्यक्ति मे सगति का अभाव है। इसी पद से साम्य रखता
एक और भी निम्नांकित पद प्राप्त है --
या मोहँन के मै रूप लुभानी।
सुन्दर वदन कमल दल लोचन, बाँकी चितवन मद मुसकानी।