सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

पृष्ठ 333, कुल 365 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 333

वैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २८३
हाँरे वा'ला मै जलबीच उघाडी ।
उभी राधा अरज करत है, दो चीरदो ओ गिरधारी ।
प्रभु मैं तेरे पाय परूँगी ।
जो राधा तेरो चीर चहावत हो, जल से हो जा न्यारी ।
हाँ रे, वा'ला जल से हो जा न्यारी ।
जल से न्यारी कान्हा कबुए न होव्गी, तुम हो पुरुष हम नारी ।
लाज मोकूँ आवत भारी ।
तुम तो कुँवर नन्दलाल कहावो, मैं बृषभानु दुलारी ।
हाँ रे, वा'ला मे वृषभानु दुलारी ।
मीराँ के प्रभु गिरधर ना गुण, तुम जीते हम हारी ।
चरण जाऊँ बलिहारी ॥ ५०६ ॥†
उपर्युक्त पद की भाषा पर खडी बोली का और शैली पर
गुजराती भाषा मे प्राप्त पदों की शैली का प्रभाव सुस्पष्ट है ।
गुजराती में प्राप्त पद
१
वारो यशोदा तारा दानी ने, आली गारा आल करे छे ।
लाडकवायो बाई लामज तमने, ते थी घनो राधा राणी ने ।
जल यमुना जतॉ मारगे पालव, ग्रहियो मारो तानी न ।
एक बार साख्युं बीजी बार साख्युं शरम तमारी घनी आनी ने ।
बाई मीराँ के प्रभु गिरधर ना गुण, चरण कमल चित मानी ने ॥५०७॥†
२
बोले झीणा मोर, राधे तारा डुँगरिया पर बोलेझीणा मोर ।
ए मौर ही बोले ब पैया ही बोले, कोयल करे घन शोर ।
······भली बीजली चमके, बादल हुआ घन घोर ।
झरमर झरमर मेहुलो बरसे, भीजे मारा सालुडानी कोर ।
बाई मीराँ के प्रभु गिरिधर ना गुण,प्रभुजी म्हाँरा चितडानो चोर॥५०८॥†