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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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पृष्ठ 169

११० मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
चल्यो जा रे असल गुवार¹ तन्ने² मेरी के पडी ।
गुरु म्हारा दीनदयाल हीरा रा पारखी ।
दियो म्होने ज्ञान बताय, सगत कर साध री ।
खोई कुल की लाज, मुकुन्द थारे कारणे ।
बेग ही लीज्यो सम्हाल मीराँ पडी बारणे³ ॥१८४॥†
यह पद कुछ हेरफेर से निम्नाकित रूप मे भी मिलता है
“गाई थॉरो पीहर ॰ सासू लड़ी ।” पक्ति के बाद निम्नाकित
पक्ति है —
“नहि म्हारो पीहर दूर घरा सासू लडी” जो पूर्वापर सगति को
दखते अधिक उपयुक्त प्रतीत होती है ।
“दियो म्हाने ˚ साध री” पक्ति के बाद निम्नाकित चार
पक्तियाँ है .
इण सरवरिया रा हस, सुरग थॉरी पाखड़ी ।
राम मिलण कब होय फड़ुके म्हॉरी आँखड़ी ।
राम गये बनवास को सब रग ले गये ।
ले गये म्हॉरी काया को सिंगार, तुलसी की माला दे गये ।”
पूर्वापर सबध देखते उपर्युक्त पक्तियाँ उपयुक्त नही प्रतीत होती ।
इस पदके अन्य पाठान्तरो मे भी इसकी प्रथम दो पक्तियाँ हू-बहूआयी
हैं । अन्तिम दोनो पंक्तियो की अभिव्यक्ति विचारणीय है ।
पाठान्तर १,
ऊभी मीराँ सरवरिया री पाल, मन मे आमण दूमणी४ ।
भर भर धोबा धोये नैन साधां रे संग जोवती⁵ ।
१ मूर्ख, २ तुमको, ३ शरण, ४ आमणदूमणी आशकाजनित व्याकुलता,
व्याकुलतायुक्त, ५ प्रतीक्षा करती ।