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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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संघर्षाभिव्यक्ति १०९
देवीप्रसाद तथा अधिकांश आधुनिक विद्वानो के मतानुसार अपने
मुँह लगे “मुसाहिब जो बीजावर्गी जात का महाजन था” की सलाह से
ही (इसीके द्वारा) राणा ने मीराँ तक विष पहुँचाया था। कहा जाता है
कि मरते मरते मीराँ ने श्राप दिया था जिसके कारण आज तक इनके
कुटुम्ब मे धन और सन्तान दोनो की एक साथ वृद्धि नही होती।
यदि इस विषपान द्वारा मीराँ की मृत्यु मान ली जाती है तो तथाकथित
मीराँ के पदो की रचयित्री यह कौन देवी है ? इस घटना पर
ऐतिहासिक दृष्टिकोण से खोज करने पर बहुत सम्भव है कि मीराँ के
जीवन पर गहरा प्रकाश पड सके।
पद की सातवी पक्ति “मेडतिया 'कहायो” दूसरी विचारणीय
पदाभिव्यक्ति है। स्पष्ट ही इस पक्ति का शेष पद से पूर्वापर
सबंध नही मिलता। भाषा की दृष्टि से भी यह पक्ति विचारणीय है।
सम्पूर्ण पद की भाषा ठेठ राजस्थानी है, परन्तु इस पक्ति पर ब्रजभाषा
की छाप है।'
पद की अतिम पक्ति मे प्रयुक्त “जन” शब्द विचारणीय है।
पूर्वापर सबंध को देखते हुए यह शब्द “भक्त” के अर्थ मे भी प्रयुक्त
हुआ प्रतीत होता है। सत-मत से प्रभावित तथाकथित मीराँ के कुछ
पदो मे 'जन' शब्द का प्रयोग मिलता है। अन्तिम तीनो पक्तियो की
भाषा शेष पद से भिन्न पडती है। सम्पूर्ण पद की भाषा पुरानी
राजस्थानी है जब कि इन तीन पक्तियो की भाषा आधुनिक
राजस्थानी ही कही जा सकती है। क्या यह संभव नही है कि यह तीन
पक्तिया ही पीछे से जुडा ली गयी हो। यो भी, पदको प्रामाणिक मान
लेने पर अद्यावधि मान्य वृत्तान्त को बहुत कुछ बदल देना होगा।
१७
इण सरवरिया री पाल मीराँ बाई सांपडे¹।
[L27: ] सापड किया असनान सूरज सामी² जप करे।
होय बिरगी³ नार डगराँ⁴ बीच क्यूँ खडी ?
काई थांरो पीहर दूर घराँ सासू लडी 7
१ तैर रही हैं, २ सम्मुख, ३ उत्साहहीन, उदास, ४ रास्ते।