मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंघर्षाभिव्यक्ति १११
तू छे ए भले घर री नार¹ गेले बीच क्यूँ खँडी।
के थारो पियो परदेस के थॉरी सासू लड़ी।
चल्यो जा रे असल गवार तन्ने मीराँ की के पड़ी।
चल्यो जा रे असल ग्वार तन्ने मेरी के पडी।
म्हारे हर गया बनवास ने सदेशा ओ हर ने ज्यूँ खडी।
पोवे मोतीडारो हार हीरा री राखडी²।
राधा रुकमण को नोसर हार किसन जी की राखडी।
उड जा उड जा सरवरियाँ हस जे सुरग थारी पाखडी।
कद आसी गोपिया वालो कान्ह फरके बाई आखडी।
सतगुरु मिलिया चतुर सुजान हीरा रा कहिए पारखी।
पाठान्तर २,
ऊभी मीरा, सरवरिया री पाल,
ऊदासी मीराँ क्यूँ खडी, थे छो भले घर की नार।
के थारो पियो दूर, काईं थाने सासु लडी।
ना म्हारो पियो दूर, ना सासु लडी।
जा न जा असल गँवार, मीराँ की तन्ने के पड़ी।
आज म्हाँरा हर गया बनवास ने, संदेशा ल्यूँ खड़ी।
गया है तो मीराँ जान भी द्यो, थारो काईं ओ ले गया गोपाल।
ले गया ले गया म्हारा हर जी सोलह सिणगार।
ढक गया प्रभुजी सजन किवाड़।
ताला ढँक कूँची³ ले गया।
कद म्हाँरा प्रभुजी आवे बनवास संदेशा ल्यूँ खड़ी।
उड़ जा उड जा सरवरिया रा हस सोने मे गढा दूँ तेरी चॉच
रूपे मे गढा दूँ तेरी पाखड़ी।
१ स्त्री। नारी राजस्थानी मे शब्द की मात्राओ पर ध्यान नही दिया
जाता। प्राय अकार और इकार लय की सुविधानुसार परिवर्त्तित हो जात हैं।
२ राखी, शुभ समझा जाने वाला एक प्रकार का जेवर, ३ ताली।