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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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प्रयोगाभिव्यक्ति ५७
८
रानी हो।
हारते, सब रैण बिहानी हो।
ـــــ ख तई, मन एक न मानी हो।
बिन देखे कल ना परे, जिय ऐसी ठानी हो।
अंग छीन व्याकुल भई, मुख पिय पिय बानी हो।
अन्तर वेदन विरह की, वह पीर न जानी हो।
ज्यो चातक घन को रटै, मछरी जिमि पानी हो।
मीराँ व्याकुल बिरहणी, सुध बुध बिसरानी हो ॥१२३॥
पदाभिव्यक्ति से पश्चाताप की भावना ही प्रकट होती है।
ऐसी अभिव्यक्ति राजस्थानी के कुछ पदो में भी पायी जाती है।
९
पलक न लागै मेरी स्याम बिन।
हरि बिन मथुरा ऐसी लागे, शशि बिन रैन अधेरी।
पात पात वृन्दाबन ढूँढ्यो, कुज कुज ब्रज केरी।
ऊँचे खडे मथुरा नगरी, तले बहै जमुना गहरी।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, हरि चरणन की चेरी ॥१२४॥
पद की तीसरी पक्ति का शेष पद से पूर्वापर सबन्ध नही बैठता ।
१०
नीद नही आवे जी सारी रात।
करवट लेकर सेज टटोलूँ, पिया नही मेरे साथ।
सगरी रैन मोहे तरफत बीती, सोच सोच जिया जात।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, आज भयो परभात ॥१२५॥