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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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पृष्ठ 113

वियोगाभिव्यक्ति ५५
५०
म्हारी सुध ज्यो जाणो ज्यो लीजो जी।
पल पल भीतर पंथ निहारूं, दरसण म्हाने दीजो जी।
मै तो हू बहु औगण हारी, औगण१ चित मत दीजो जी।
मै तो दासी थारे चरण कवल की, मिल बिछुरन मत कीजो जी।
मीराँ तो सतगुरु जी सरणे, हरि चरणा चित दीजो जी। ॥७८॥ †
तृतीय पक्ति का निम्नांकित पाठान्तर भी मिलता है।
“मै तो दासी थारे चरणा जना की, मिल बिछुरन मत कीज्यो जी।”
इस पद के विभिन्न बोलियो से प्रभावित कई पाठ मिलते है।
उपर्युक्त पाठ की भाषा राजस्थानी है।
पाठान्तर १,
सजन, सुध ज्यूँ जानै त्यूँ लीजै हो।
तुम बिन मोरे और न कोई, किरपा रावरी कीजै हो।
दिन नही भूख रैण नही निद्रा, यूँ तन पल पल छीजै हो।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, मिल बिछुडन मत कीजै हो। †
'हो' और 'रावरी' जैसे शब्दो के प्रयोग से इस पाठ पर अवधी
का प्रभाव प्रतीत होता है। प्रथम पक्ति मे निम्नांकित पाठान्तर भी
मिलता है।
“ज्यों जानो त्यो लिये सजन, सुधि ज्यों जानो त्यो लीजै।”
पाठान्तर २,
साजन सुधि ज्यो जाणो, त्यो लीज्यौ जी।
म्हे तो दासी जनम जनम की, किरपा रावरी कीज्यौ जी।
उठत बैठत जागत सोवत कबहुक, याद करीज्यौ जी।
१ अवगुण।