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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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पृष्ठ 106

वियोगाभिव्यक्ति ' ४७
३२
म्हारे घर होता जाज्यो राज ।
अब के जिन¹ टाला दे जावो, सिर पर राखूँ विराज ।
पावणडा² म्हाके भले ही पधारो, सब ही सुधारण काज ।
म्हे तो जनम जनम की दासी, थे म्हारा सिरताज ।
म्हे तो बुरी छा,थाके भली छै घणेरी,तुम हो एक रसराज ।
थाने हम सब दिन की चिंता,तुम सब के हो गरीब निवाज ।
सब के मुगुट सिरोमनि, सिर पर मानूँ पुण्य की लाज ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, बाह गहे की लाज ॥६०। '†
पाठान्तर १,
होता जाज्यो राज, महलाँ म्हारे होता जाज्यो राज ।
मे अगुणी मेरा साहब सुगुणा, सत सवारे काज ।
मीराँ के प्रभु मन्दिर पधारो, कर केसरिया साज ।†
इस द्वितीय पाठान्तर की भाषा अधिक शुद्ध है । प्रथम पाठ
की अभिव्यक्ति मे पूर्वापर सबंध का अभाव है।
३३
साजन, बेगा³ घर आज्यो जी ।
आदि अतर रा यार हमारा, हम को सुख लाज्यो जी ।
निसि दिन चित चरणा धरू, हो मनडा ते न बिसरू ।
नजरि परै तुजि ऊपरि, धन जोवन वारू ।
हो मे पतिवरता रावरी, काहू तन काजै जी ।
अपनी वोरि निहारि के, प्रीति निभाज्यो जी ।
हरि बिन सुरति कहा धरू, नित मारग जोऊ जी ।
१ नही, २ अतिथि, ३ शीघ्र ।