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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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पृष्ठ 107

४८ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
सांईं तेरे कारणे, भरि नीद न सोऊ हो।
बिछरिया दिन बहु भया, बेगा दरस दिखाय्जो जी।
प्रीति पुराणी जाणि कै, वाही कृपा रखाय्जो जी।
मेरे अवगुण देखि कै, तुम नाहि तुलाज्यो जी।
मेरे कारण रावरो, मति बिडद लाज्यो जी।
वा बिरिया कब होसी, कोई कहै सदेशा हो।
मीराँ के उणवात रो, मति परो अनेसा हो। ॥६१॥†
पदाभिव्यक्ति मे असंगति और पुनरुक्ति है।
३४
आवो मनमोहना जी जोऊ थारी बाट।
खान पान मोहि नेक न भावै, नैण न लागे कपाट।
तुम आया बिन सुख नाहि मेरे, दिल मे बहोत उचाट।
मीराँ कहे मै भई रावरी, छाडो नही निराट¹। ॥६२॥
३५
आवो मनमोहना जी मीठा थारां बोल।
बालपना की प्रीत रमइया जी, कदे² नहि आयी थारो तोल।
दरसण बिना मोहि जक³ न पड़त है, चित्त मेरो डावाडोल।
मीराँ कहै मै भई रावरी, कहो तो बजाऊ ढोल। ॥६३॥
पद की द्वितीय पंक्ति से व्यक्त होती भावना विशेष विचार-
णीय है।
३६
कोई कहियो रे विनती जाइकै, म्हारा प्राण पिया नाथ ने।
जा दिन के बिछुरे मन मोहनं, कल न परे दिन रात नै।
१ निरावलम्ब २ कभी, ३ चैन ।