मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
पृष्ठ 105, कुल 365 में से
संदर्भ में पढ़ें४६ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
२९
म्हारे घर आवो जी, राम रसिया, थारी सावरी सूरत मन बसिया।
घुडला जीव पूरबो मोहन, बखतर खासा कसिया ।
चुन चुन कलिया सेज बिछाई; ऊपरि राखिया तकिया ।
सिरे- गाय की पूँछ मगायो, चावल गेया पसिया ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, चरण कवल मन बसिया ।।५७।।†
पदाभिव्यक्ति अर्थ हीन है।
?
३०
भवन पति, तुम घरि आज्यो हो।
बिदा तागी तन माहिने (म्हारी) तपत बुझाज्यो हो।
रोवत रोवत डोलॉत, सब रैण बिहावै हो।
भूख गई, निदरा गई, पापी जीव न जावै हो।
दुखिया को सुखिया करो, मोहि दरसण दीजै हो।
मीराँ व्याकुल विरहणी, अब बिलम न कीजै हो। ।।५८।।
पद की भाषा मुख्यत. राजस्थानी है, अत भाषा के दृष्टि कोण से
'डोलॉत' प्रयोग के बदले 'डोलता' प्रयोग ही विशेष शुद्ध है। 'डोलता'
का अर्थ है घूमते हुए ।
३१
बेग पधारो सावरा कठिन बनी है, आप बिना म्हारो कूण धनी है।
दुखिया कूँ देख देर मत कीज्यो, देर की बिरिया और घणि है।
दिन नही चेत, रैन नही निद्रा, दुसमन के हिये हरस घणि है।
जमडा की फौजा प्रभु आन पड़ी है, बेग हटावो मोटा आप धनीहै।
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर, चरण कवल बिच आन खडी है।
।।५९।।†
पद मे पूर्वापर सबन्ध का निर्वाह नही हुआ है।