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मत्तविलास प्रहसनम् (पल्लव नरेश महेन्द्रविक्रमवर्मा - कांचीपुरम सामाजिक व्यंग्य संस्कृत-हिन्दी सटीक)

मत्तविलास प्रहसनम् (पल्लव नरेश महेन्द्रविक्रमवर्मा - कांचीपुरम सामाजिक व्यंग्य संस्कृत-हिन्दी सटीक)

Mattavilasa Prahasana of Mahendravarman I

पल्लव सम्राट् महेन्द्रविक्रमवर्मा (व्याख्या: रानी मजूमदार) द्वारा

DevanagariHindipublished100 पृष्ठ

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पृष्ठ 88

७६ मत्तविलास-प्रहसन
३. अभिधम्मपिटक (इसमें दार्शनिक विषयों का विवेचनात्मक
अध्ययन है ।)
इन पिटकों में अनेक छोटे-छोटे ग्रन्थ हैं। विनयपिटक में सात और
अभिधम्मपिटक में छः ग्रन्थ हैं। सुत्तपिटक में पांच निकाय (सुत्तसमूह) हैं—
१. दीघ निकाय (३४ सुत्त), २. मज्झिम निकाय (१५२ सुत्त),
३. संजुत्त निकाय (५६ संजुत्त), ४. अंगुत्तर निकाय (११ निकाय),
५. खुद्दक निकाय—इस निकाय में १५ छोटे-छोटे ग्रन्थ हैं जिनमें बुद्ध के
पूर्वजन्म से सम्बद्ध ५५० कथाओं का संग्रह जातक रूप में मिलता है जो
अत्यन्त विख्यात है।
संक्षेप में बौद्ध धर्म के त्रिपिटक को इस प्रकार समझा जा सकता है—
त्रिपिटक
───────────────────────┬───────────────────────
विनयपिटक सुत्तपिटक अभिधम्म पिटक
(७ ग्रन्थ) (संकलन) | (७ ग्रन्थ)
┌───────┴──────┐ १. धम्मसंगणि
सुत्तविभंग खंधक परिवार २. विभंग
┌───┴───┐ | ३. धातुकथा
महाविभंग भिक्खुणीविभंग ४. पुग्गल पंञति
┌────┴────┐ ५. कथावत्थु
महावग्ग चुल्लवग्ग ६. यमक
┌─────────┬──────────────┬──────────────┬──────┴────────┐ ७. पट्ठान
दीघनिकाय मज्झिमनिकाय संजुत्तनिकाय अंगुत्तरनिकाय खुद्दकनिकाय
(१५ ग्रन्थ)
१. खुद्दक पाठ, २. धम्म पद, ३. उदान, ४. इतिवृत्तक,
५. सुत्तनिपात, ६. विमानवत्थु, ७. पेतवत्थु, ८. थेरगाथा, ९. थेरीगाथा,
१०. जातक, ११. निद्देस, १२. पटिसंविधा, १३ अपदान, १४. बुद्धवंश,
१५. धम्मपिटक या चरीयपिटक ।