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मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished866 पृष्ठ

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पृष्ठ 211

१९६ मार्क्सवाद और रामराज्य
अमीबाकी एकाएक उत्पत्ति मान लेते हैं; परंतु अनेक कोष्ठसंयुक्त मनुष्य-प्राणीका
आप-से-आप उत्पन्न होना नहीं मानते। परंतु बात सरल है, जिस महाशक्तिके प्रभावसे
एक कोष्ठवाला अमीबा उत्पन्न हो सकता है, उस शक्तिको अनेक कोष्ठवाले मनुष्यके
उत्पादनमें क्या कठिनाई है ? जो बड़े-बड़े सूर्य, चन्द्र और छोटे-छोटे अमीबाको
बना सकती है, वही शक्ति गाय, बैल, हाथी, बंदर, मनुष्य सबको बना सकती है।
आरम्भिक सृष्टिको नये-पुराने सभी विद्वान् 'अमैथुनी सृष्टि' नामसे कहते हैं।
प्रो० मैक्समूलर लिखता है—'कहा जाता है कि आदिमें एक ही मनुष्य नहीं था,
किंतु हम हर प्रकारसे यह ख्याल कर सकते हैं कि आदिमे कुछ पुरुष और स्त्रियाँ
उत्पन्न हुई थीं।' मद्रास हाईकोर्टके जज टी० एल० स्ट्रेन्ज अपनी 'दि डेव्हलप्मेंट
ऑफ क्रियेशन् ऑन दी अर्थ ( पृथ्वीपर सृष्टिका विकास )' पुस्तकमें लिखते हैं कि
'आदि सृष्टि अमैथुनी होती है। इस अमैथुनी सृष्टिमें उत्तम और सुडौल शरीर
बनते हैं।' 'वैशेषिक दर्शन' का भी कहना है कि 'शरीर दो प्रकारका होता है—
योनिज और अयोनिज'—'तत्र शरीरं द्विविधं योनिजमयोनिजं च।' इसपर
'प्रशस्तपादीय भाष्य' है।
'तत्रायोनिजमनपेक्षितशुक्रशोणितं देवर्षीणां शरीरं धर्मविशेषसहिते-
भ्योऽणुभ्यो जायते।'
अर्थात् देवता और ऋषियोंके शरीर शुक्र-शोणितके बिना ही धर्मविशेष-
सहित अणुओंसे उत्पन्न होते हैं। इन सब बातोंसे सिद्ध होता है कि विकासवाद
अत्यन्त भ्रान्तिपूर्ण वाद है।
मनुष्य-जाति
'मनुष्य-जातिका विकास वनमनुष्योंसे हुआ है,' 'जावाद्वीपके कलिंग नामक
मनुष्य अधिकतर वनमनुष्योंसे मिलते हैं, अतः वे ही मनुष्य-जातिके पूर्वपितामह
हैं', यह सब कथन भ्रान्तिपूर्ण हैं। अतएव जो कहा जाता है कि 'यही मनुष्य-
समुदायकी समस्त शाखाओंका जन्मदाता है' यह सब भी भ्रान्तिपूर्ण है, क्योंकि
जब विकासवादका सिद्धान्त ही खण्डित हो गया, तब उसके आधारपर शास्त्र-
विरुद्ध कोई कल्पना निराधार ही है। आजकलका सिद्धान्त है कि मनुष्य-जाति-
के चार विभाग हैं, उसीके भीतर हजारों विभाग आ जाते हैं—( १ ) श्वेत रंग,
लम्बी आकृतिवाला काकेशस, ( २ ) पीले रंग, चौड़ी आकृतिवाला मंगोलिक,
( ३ ) काले रंग, मोटी आकृतिवाला ईथियोपिक ( निग्रो ) और ( ४ )
लाल रंग और पतली आकृतिवाला रेडइण्डियन। आधुनिक वैज्ञानिकोंका कहना
है कि मनुष्य-जातिके चारों विभागोंमें काकेशस विभाग सर्वश्रेष्ठ है। इस विभागके
लोग गौरांग हैं। इसी विभागसे सब रंगवालोंकी उत्पत्ति हुई है ! विद्वानोंकी