सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संक्षिप्त मार्कण्डेय पुराण

संक्षिप्त मार्कण्डेय पुराण

Markandeya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished296 पृष्ठ

पृष्ठ 215, कुल 296 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 215

• चण्ड और मुण्डका वध •
२९५
एक ही हाथसे पकड़कर मुँहमें डाल लेती
थीं ॥१०॥ इसी प्रकार घोड़े, रथ और सारथिके
साथ रथी सैनिकोंको मुँहमें डालकर वे उन्हें बड़े
भयानक रूपसे चबा डालती थीं ॥ ११॥ किसीके
बाल पकड़ लेतीं, किसीका गला दबा देतीं,
किसीको पैरोंसे कुचल डालतीं और किसीको
छातीके धक्केसे गिराकर मार डालती थीं ॥ १२ ॥ वे
असुरोंके छोड़े हुए बड़े बड़े अस्त्र-शस्त्र मुँहमें
पकड़ लेतीं और रोषमें भरकर उनको दाँतोंसे
पीस डालतीं ॥ १३ ॥ कालीने बलवान् एवं दुरात्मा
दैत्योंकी वह सारी सेना रौंद डाली, खा डाली
भयङ्कर बाणोंकी वर्षासे तथा हजारों बार चलाये
हुए चक्रोंसे उन भयानक नेत्रोंवाली देवीको आच्छादित
कर दिया ॥ १७॥ वे अनेकों चक्र देवीके मुखमें
समाते हुए ऐसे जान पड़े, मानो सूर्यके बहुतेरे
मण्डल बादलोंके उदरमें प्रवेश कर रहे हों ॥१८॥
तब भयङ्कर गर्जना करनेवाली कालीने अत्यन्त
रोषमें भरकर विकट अट्टहास किया। उस समय
उनके विकराल वदनके भीतर कठिनतासे देखे जा
सकनेवाले दाँतोंकी प्रभासे वे अत्यन्त उज्ज्वल
दिखायी देती थीं ॥ १९ ॥ देवीने बहुत बड़ी तलवार
हाथमें ले 'हुं' का उच्चारण करके चण्डपर धावा
किया और उसके केश पकड़कर उसी तलवारसे
उसका मस्तक काट डाला ॥ २० ॥
अथ मुण्डोऽभ्यधावत्तां दृष्ट्वा चण्डं निपातितम् ।
तमप्यपातयद्भूमौ सा खड्गाभिहतं रुषा ॥ २१ ॥
हतशेषं ततः सैन्यं दृष्ट्वा चण्डं निपातितम् ।
मुण्डं च सुमहावीर्यं दिशो भेजे भयातुरम् ॥ २२ ॥
शिरश्चण्डस्य काली च गृहीत्वा मुण्डमेव च ।
प्राह प्रचण्डाट्टहासमिश्रमभ्येत्य चण्डिकाम् ॥ २३ ॥
और कितनोंको मार भगाया ॥ १४ ॥ कोई तलवारके
घाट उतारे गये, कोई खट्वाङ्गसे पीटे गये और
कितने ही असुर दाँतोंके अग्रभागसे कुचले जाकर
मृत्युको प्राप्त हुए ॥ १५ ॥ इस प्रकार देवीने असुरोंकी
उस सारी सेनाको क्षणभरमें मार गिराया। यह देख
चण्ड उस अत्यन्त भयानक कालीदेवीकी ओर
दौड़ा ॥ १६ ॥ तथा महादैत्य मुण्डने भी अत्यन्त